Breast Cancer Cases: भारत में पिछले तीन दशकों में स्तन कैंसर के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव और भोजन संबंधी अस्वस्थ आदतें मुख्य कारण हैं। मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट ऑन्कोलॉजी' में प्रकाशित एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, इस दौरान देश में स्तन कैंसर के मरीज़ों की संख्या लगभग पाँच गुना बढ़ गयी है।
यह शोध बताता है कि पारंपरिक भारतीय खान-पान के तरीकों से हटकर पश्चिमी शैली के खाने की आदतों को अपनाने से लोगों की सेहत पर काफ़ी असर पड़ा है। विश्लेषण में बताया गया है कि पारंपरिक भारतीय भोजन के तरीके जिसमें सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और घर का बना संतुलित भोजन शामिल होता है, को छोड़कर, डिब्बाबंद भोजन और फ़ास्ट फ़ूड के अधिक सेवन से कैंसर का खतरा बहुत बढ़ा है ।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पश्चिमी "जंक फ़ूड" संस्कृति के फैलने से स्तन कैंसर का खतरा काफ़ी बढ़ गया है। शोध के मुताबिक, खाने की इन बदलती आदतों और जीवनशैली के तरीकों से जुड़े मामलों में लगभग 477.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण, सुस्त जीवनशैली, डिब्बाबंद भोजन का ज़्यादा सेवन और शारीरिक गतिविधियों में कमी, ये सभी इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं। इन आदतों ने पोषण के सेवन और मेटाबॉलिक सेहत को बदल दिया है, जिससे स्तन कैंसर सहित कई गैर-संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि संतुलित खान-पान की आदतों को फिर से अपनाना और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना, इस खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। ताज़ी सब्ज़ियों, साबुत अनाज और घर का बना भोजन , नियमित शारीरिक गतिविधियाँ और समय पर स्वास्थ्य जाँच, स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने और उसकी रोकथाम के लिए बहुत ज़रूरी मानी जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी भारत में स्तन कैंसर के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए महिलाओं में शुरुआती लक्षणों, नियमित जाँच और जीवनशैली के प्रबंधन के बारे में ज़्यादा जागरूकता पर ज़ोर दिया है।



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