US-Israel-Iran War Live: ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के मिलकर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में लड़ाई का एक नया चैप्टर शुरू हो गया है, जिससे पूरे इलाके और उससे आगे तनाव तेज़ी से बढ़ गया है। इन घटनाओं ने एक बड़े युद्ध का डर पैदा कर दिया है और ग्लोबल स्टेबिलिटी को हिला दिया है।
US और इज़राइल ने ईरान पर हमला क्यों किया?
यह मिलिट्री कैंपेन ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट (ballistic missile development) और मिलिटेंट ग्रुप्स को सपोर्ट देने की चिंताओं की वजह से किया गया था। 2026 की शुरुआत में डिप्लोमैटिक बातचीत से ज़रूरी झगड़े हल नहीं हो पाए और तेल अवीव और वाशिंगटन दोनों ने कहा कि तेहरान की बढ़ती मिलिट्री क्षमताएँ सीधा खतरा हैं। 28 फरवरी, 2026 को, US और इज़राइली सेनाओं ने मिलकर हवाई और मिसाइल हमले किए, जिनमें कई हाई-वैल्यू ईरानी मिलिट्री साइट्स और लीडरशिप कंपाउंड्स को निशाना बनाया गया। मिलिट्री अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को पहले से तैयारी वाला बताया, जिसका मकसद ईरान की ऐसे हमले करने की काबिलियत को कम करना था जिससे वह बदले की कार्रवाई से 'इम्यून' हो सके।
इज़राइली हमलों के बाद तेहरान में धमाकों की खबर
हमलों की पहली लहर में तेहरान और ईरान के दूसरे शहरों में बड़े धमाके हुए, जिससे मिलिट्री ठिकानों और स्ट्रेटेजिक लीडरशिप साइट्स को नुकसान पहुंचा। इस हमले ने दशकों से चल रहे प्रॉक्सी झगड़ों को और बढ़ा दिया, जिसमें अमेरिकी सेना सीधे इज़रायल के साथ शामिल थी।
क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मर गए हैं?
इस झगड़े ने एक बड़ा मोड़ तब लिया जब 1 मार्च, 2026 को शुरुआती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Supreme Leader Ali Khamenei) मारे गए। ईरानी सरकारी मीडिया और इंटरनेशनल आउटलेट्स ने उनकी मौत की पुष्टि की, जिससे देश में शोक मनाया गया, लीडरशिप में फेरबदल हुआ और ईरानी अधिकारियों ने बदले की कार्रवाई का वादा किया। तेहरान में अब अंतरिम लीडरशिप आ गई है, जबकि ईरान और हिज़्बुल्लाह जैसे उसके साथी ग्रुप्स ने इज़रायली शहरों और खाड़ी में अमेरिकी बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। तीन दशक से ज़्यादा समय तक राज करने वाले लीडर के जाने पर दुनिया भर में रिएक्शन आए हैं, जिसमें रूस, चीन और दूसरे देशों की तरफ से तनाव कम करने और बुराई करने की मांग शामिल है।
मिडिल ईस्ट ने इमरजेंसी क्यों घोषित की है
ईरान के जवाबी हमले उसकी सीमाओं से बाहर फैल गए हैं। मिसाइलों और ड्रोन ने UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में इज़राइल और US मिलिट्री एसेट्स को निशाना बनाया है। लेबनान से इज़राइल पर हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमलों ने इज़राइली काउंटर-स्ट्राइक को बढ़ावा दिया है। इसके चलते, इस इलाके के कई देशों ने इमरजेंसी घोषित कर दी है, जिसमें मिलिट्री तैयारी बढ़ा दी गई है और चल रही गोलीबारी के बीच आम लोगों को बढ़ते खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान-इज़राइल युद्ध दुनिया पर कैसे असर डाल रहा है?
इस लड़ाई का असर मिडिल ईस्ट से कहीं आगे तक फैला है:
तेल की कीमतें बढ़ रही हैं: फारस की खाड़ी के खास एनर्जी कॉरिडोर में अस्थिरता के डर से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
उड़ानों में रुकावट: कई एयरलाइंस सुरक्षा चिंताओं के कारण इस इलाके से गुज़रने वाली उड़ानों का रूट बदल रही हैं या उन्हें रोक रही हैं, जिससे इंटरनेशनल ट्रैवल पर असर पड़ रहा है।
मार्केट में उतार-चढ़ाव: ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट अनिश्चितता पर रिएक्ट कर रहे हैं, जबकि पूरे इलाके में मौतें और बेघर होने की संख्या बढ़ रही है। बड़ी चिंता के बावजूद, डिप्लोमैटिक समाधान सीमित हैं क्योंकि ग्लोबल लीडर शांति की अपील कर रहे हैं।
ईरान-इज़राइल युद्ध में आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन यह अभी तक ग्लोबल लड़ाई नहीं है। मुख्य लड़ाके अमेरिका, इज़राइल और ईरान बने हुए हैं, हालांकि हमले और जवाबी हमले खाड़ी देशों और लेबनान तक फैल गए हैं। जिन खास डेवलपमेंट पर नज़र रखनी है, उनमें ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर US-इज़राइल के लगातार हमले, ईरान और उसके साथियों की जवाबी कार्रवाई और अगर तनाव बढ़ता रहा तो दूसरी बड़ी ताकतों का शामिल होना शामिल है।
अब तक की टाइमलाइन:
28 फरवरी: US और इज़राइल ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया।
1 मार्च: सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए।
2 मार्च: ईरान ने इज़राइल और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
एनालिस्ट चेतावनी देते हैं कि गलत अंदाज़े से बड़ा टकराव शुरू हो सकता है, जिससे दुनिया परेशान हो सकती है।



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