पेड पीरियड लीव पर सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला! कहा- महिलाओं को इतना कमज़ोर ...! कोर्ट ने सुनवाई करने से किया मना

Fri, Mar 13 , 2026, 02:36 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Supreme Court on Paid Period Leave Petition: सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स से जुड़ी शारीरिक परेशानी को देखते हुए महिला कर्मचारियों को 'पेड मेंस्ट्रुअल लीव पॉलिसी' (Paid Menstrual Leave Policy) देने की मांग वाली पिटीशन पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। आज (शुक्रवार, 13 मार्च, 2026) हुई सुनवाई में कोर्ट ने बहुत ज़रूरी बातें कहीं। 

महिलाओं को इतना कमज़ोर न समझें
यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने हुई। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, "महिलाओं को इतना कमज़ोर न समझें (पेड मेंस्ट्रुअल लीव पॉलिसी)। हालांकि आपकी मांग सुनने में सही लगती है, लेकिन आखिर में इससे महिलाओं को नुकसान होगा। अगर पेड लीव ज़रूरी कर दी जाती है, तो कंपनियां महिलाओं को नौकरी पर रखने पर विचार करेंगी।" कोर्ट ने यह भी साफ़ किया है कि ऐसी पिटीशन महिलाओं की एफिशिएंसी पर बुरा असर डालती हैं और काम पर उनकी तरक्की में रुकावटें पैदा करती हैं। 

पिटीशनर की तरफ से सीनियर वकील एम. आर. शमशाद ने दलील दी कि केरल सरकार ने स्कूलों में ऐसा सिस्टम लागू किया है और कई प्राइवेट कंपनियां अपनी मर्ज़ी से ऐसी छुट्टियां दे रही हैं। इस पर कोर्ट ने जवाब दिया, "अगर कोई कंपनी अपनी मर्ज़ी से छुट्टी दे रही है, तो यह अच्छी बात है। लेकिन, अगर हम इसे कानून बनाकर ज़बरदस्ती लागू करते हैं, तो महिलाओं को ज्यूडिशियरी या सरकारी नौकरियों में भी प्रायोरिटी नहीं दी जाएगी। इससे महिलाओं का करियर खत्म हो सकता है।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हालांकि यह कॉन्सेप्ट अच्छा है, लेकिन उन एम्प्लॉयर्स की सोच पर भी विचार करना ज़रूरी है जो पेड लीव देना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि पिटीशनर इस बारे में सरकार को पहले ही एक रिप्रेजेंटेशन दे चुका है। अब संबंधित केंद्र और राज्य सरकारों को सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करके इस पॉलिसी पर फैसला करना चाहिए। इस पिटीशन पर बोलते हुए कोर्ट ने कहा कि मेंस्ट्रुअली कोई 'बुरी घटना' नहीं है। ऐसी मांगों से समाज में यह मैसेज जाता है कि महिलाएं कमज़ोर हैं, जो गलत है। सरकार इस पर चर्चा करके सही फैसला ले सकती है, लेकिन कोर्ट इस बारे में कोई ज़रूरी आदेश जारी नहीं कर सकता, यह भी कोर्ट ने साफ़ किया है। 

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