रांची: झारखण्ड राज्य बनने के 25 वर्ष पूरे कर विजन 2050 की ओर अपने क्रिटिकल मिनरल्स के साथ आगे बढ़ रहा है, जो न सिर्फ भारत के आर्थिक उत्थान को गति देगा बल्कि वैश्विक आर्थिक आयामों में भी सहायक होगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड के लिए इस बात को विश्व आर्थिक मंच तक ले जाना निवेश से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह संसाधन-समृद्ध क्षेत्र की वास्तविक परिभाषा को फिर से परिभाषित करने के बारे में है।
झारखण्ड दुनिया को संदेश देगा कि खनिज संपदा, प्रौद्योगिकी, नीति सुधार और पर्यावरण सुरक्षा के साथ समावेशी विकास तथा रोजगार सृजन के लिए संसाधन समृद्ध क्षेत्र वाहक बन सकता है। झारखण्ड की मिट्टी में मौजूद खनिजों को अब विश्व के ऊर्जा परिवर्तन के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। ये वही क्रिटिकल मिनरल्स हैं जो सौर ऊर्जा, पवन चक्कियों, बैटरी उत्पादन, हाइड्रोजन गैस से संबंधित उद्योगों, इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और स्मार्ट ग्रिड के विकास में सहायक हैं।
जैसे-जैसे दुनिया इन दुर्लभ खनिजों के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश कर रही है वैसे-वैसे झारखण्ड खुद को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक भागीदार के रूप में दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए विजन 2050 के साथ आगे बढ़ रहा है। झारखण्ड अपने इस बढ़ते कदम को और मजबूती देने के लिए दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक और ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ संवाद करेगा। इस दौरान झारखण्ड अपने खनिजों के बदौलत भारत की औद्योगिक शक्ति, सौर, पवन, जल विद्युत और बायोमास जैसी ऊर्जा से संबंधित अर्थव्यवस्था में भारत के भविष्य की नींव रखने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी होने की बात से दुनिया को अवगत कराएगा।
हाल ही में राज्य में स्थित विश्व स्तरीय आईआईटी आईएसएम धनबाद में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में क्लीन-टेक को बढ़ावा देने को लेकर एक केंद्र स्थापित किया गया है। झारखण्ड दावोस में वैश्विक निवेशकों, निर्माताओं, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी लोगों और नीतिगत संस्थानों के समक्ष "प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास" की अपनी परिकल्पना प्रस्तुत करेगा। झारखण्ड बताएगा कि महत्वपूर्ण खनिजों का विकास जिम्मेदार खनन, उच्च-प्रौद्योगिकी प्रसंस्करण, मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और जनभागीदारी के माध्यम से होना चाहिए।
भारत पैवेलियन में आयोजित नीतिगत संवादों, निवेश बैठकों एवं अन्य सत्रों के जरिय और इसके बाद यूनाइटेड किंगडम में विभिन्न हितधारकों के द्वारा झारखण्ड महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता की सम्भावना की तलाश, प्राकृतिक स्रोतों से उपयोगी घटकों को निकालना, ग्रीन स्टील और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में मौजूद संभावनाओं को उजागर करेगा। झारखण्ड का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, प्रौद्योगिकी सहयोग और दीर्घकालिक निवेश के रोडमैप को दिखाना है जो राज्य भर में सतत औद्योगिक विकास को मजबूत आधार प्रदान कर सके।
एक सदी से भी अधिक समय से झारखण्ड भारत के सबसे महत्वपूर्ण खनन क्षेत्रों में से एक रहा है। राज्य में लौह अयस्क, तांबा, कोयला, बॉक्साइट, यूरेनियम, चूना पत्थर और क्रिटिकल मिनरल्स के कुछ सबसे समृद्ध भंडार मौजूद हैं। ये खनिज अब नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत गतिशीलता, एडवांस मैनुफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी हैं। इस खनिज संपदा से भारत के प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान फल-फूल रहें हैं।
झारखण्ड स्थित टाटा स्टील देश का पहला इस्पात संयंत्र, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया आदि अग्रणी उद्योगों की श्रेणी में शामिल है, जिसने श्रमिक कल्याण, शहरी नियोजन और टिकाऊ संचालन के लिए वैश्विक मानक स्थापित किए हैं। दशकों से झारखण्ड सार्वजनिक और निजी उद्यमों, इंजीनियरिंग फर्मों और खनन कंपनियों के एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का केंद्र बन गया है, जिसने राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे, रेलवे से लेकर रक्षा, ऊर्जा और भारी उद्योग समेत हर क्षेत्र को सहयोग प्रदान किया है।



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