कलाकार: जतिन सरना, मधुरिमा रॉय, प्रणय पचौरी
निर्देशक: विकास अरोड़ा
निर्माता: विपुल धवन, पूजा अरोड़ा | को-प्रोड्यूसर: रीत अरोड़ा
अवधि: 1 घंटा 53 मिनट
भाषा: हिंदी | सेंसर: यू/ए
रिलीज़ की तारीख: 06 मार्च 2026
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐
Na Jaane Kaun Aa Gaya Review : आज के दौर में जब रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं और लोगों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में 6 मार्च 2026 को रिलीज़ हुई फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया (Na Jaane Kaun Aa Gaya)’ रिश्तों की जटिलताओं और उनके भीतर छिपी भावनात्मक परतों को बेहद संवेदनशील और परिपक्व अंदाज़ में सामने लाती है। विपुल धवन (Vipul Dhawan) और पूजा अरोड़ा (Pooja Arora) द्वारा निर्मित तथा विकास अरोड़ा (Vikas Arora) के सधे हुए निर्देशन में बनी यह फिल्म एक खूबसूरत रोमांटिक ड्रामा है, जो प्यार, शादी और भावनात्मक जुड़ाव जैसे विषयों पर गहराई से बात करती है। आइए जानते हैं कैसी है यह फिल्म।
कहानी:
प्यार — कभी खुले आसमान की तरह हल्का और सुकूनभरा, तो कभी पहाड़ की तरह अडिग और जिद्दी, तो कभी शांत झील जैसा गहरा। यही छोटी-छोटी मासूम शरारतें और एहसास प्यार की पहली पहचान बनते हैं। कब यह मासूम प्यार साइकिल के पहियों से आगे बढ़कर जिंदगी की तेज रफ्तार में शामिल हो जाता है, पता ही नहीं चलता। इसके बाद रिश्तों में शुरू होता है जोड़-घटाव, उम्मीदें, ईगो, सेल्फ-रिस्पेक्ट और असुरक्षाओं का सिलसिला, और यही सब मिलकर प्यार को शादी के रिश्ते में बदल देते हैं।
इन्हीं भावनात्मक सवालों के साथ फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है। कहानी के केंद्र में हैं कौशल (जतिन सरना), जो एक चाय कंपनी में ऊँचे पद पर काम करता है, और टीना (मधुरिमा रॉय), जो उसकी सेक्रेटरी है। टीना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव और स्वभाव से बेहद चुलबुली है, जबकि कौशल अपने काम में डूबा रहने वाला और अनुशासित व्यक्ति है। ऑफिस में साथ काम करते-करते कब दोनों के बीच प्यार पनप जाता है, उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। यह रिश्ता आगे बढ़ता है और दोनों शादी कर लेते हैं। शुरुआत में उनका वैवाहिक जीवन काफी खूबसूरत और संतुलित नजर आता है। लेकिन धीरे-धीरे काम और जिम्मेदारियों के दबाव में कौशल अनजाने में टीना से भावनात्मक रूप से दूर होता चला जाता है।
बाहरी दुनिया को सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन टीना के भीतर अकेलेपन की एक खामोश परत जमने लगती है। उसे महसूस होने लगता है कि कौशल अब उसके लिए पहले जैसा भावनात्मक सहारा नहीं रहा। और ठीक इसी मोड़ पर टीना की जिंदगी में एक तीसरे शख्स की एंट्री होती है। आगे कहानी किस दिशा में जाती है, यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
परफॉर्मेंस:
जतिन सरना ने कौशल के किरदार को बेहद सादगी, ईमानदारी और गहराई के साथ निभाया है। उन्होंने अपने अभिनय से एक ऐसे व्यक्ति की मानसिकता को बारीकी से उभारा है जो अनजाने में अपने रिश्ते से दूर होता चला जाता है। ‘सेक्रेड गेम्स’ के बाद इस फिल्म में उनका बिल्कुल अलग और परिपक्व रूप देखने को मिलता है। कई दृश्यों में उनकी आंखों की भावनाएं और संवाद अदायगी दर्शकों को गहराई से छू जाती हैं।
मधुरिमा रॉय टीना के किरदार में बेहद सहज और प्रभावशाली दिखाई देती हैं। उनकी नेचुरल एक्टिंग इस किरदार को जीवंत बना देती है और दर्शक आसानी से उनके भावनात्मक संघर्ष से जुड़ जाते हैं। प्रणय ने अपने रोल को संवेदनशीलता के साथ निभाने की कोशिश की है। फ़िल्म मुख्य रूप से इन्ही तीन किरदारो के आस पास है.
निर्देशन और तकनीकी पहलू:
निर्देशक विकास अरोड़ा का निर्देशन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। उन्होंने कहानी को बिना अनावश्यक ड्रामे के बेहद संतुलित और रियलिस्टिक तरीके से प्रस्तुत किया है। रिश्तों की बारीकियों को जिस संवेदनशीलता और ईमानदारी से उन्होंने परदे पर उतारा है, वह फिल्म को खास बना देता है। फिल्म की गति भले ही कुछ जगह धीमी महसूस हो, लेकिन यह धीमापन ही कहानी को यथार्थ के करीब ले जाता है। जो दर्शक भावनात्मक और रिश्तों पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं, उनके लिए यह फिल्म खास अनुभव बन सकती है।
सिनेमैटोग्राफी फिल्म का एक और मजबूत पक्ष है। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों को बेहद आकर्षक तरीके से फिल्माया गया है, जो फिल्म को विजुअल रूप से समृद्ध बनाती हैं। संगीत भी कहानी के मूड के साथ पूरी तरह मेल खाता है। खासकर रेखा भारद्वाज की आवाज में गाया गया टाइटल सॉन्ग दिल को छू जाता है और लंबे समय तक याद रह जाता है।
क्यों देखे :
‘ना जाने कौन आ गया’ सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि रिश्तों की उस सच्चाई को सामने लाती है जो अक्सर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में अनदेखी रह जाती है। फिल्म यह एहसास कराती है कि रिश्ते केवल साथ रहने या जिम्मेदारियां निभाने से नहीं चलते, बल्कि उन्हें जिंदा रखने के लिए भावनात्मक जुड़ाव और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
फिल्म देखते हुए कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे कहानी हमारे आसपास के ही लोगों की है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। निर्देशक विकास अरोड़ा ने एक बेहद संवेदनशील विषय को सादगी, गहराई और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया है। कुल मिलाकर, यह फिल्म प्यार, जिम्मेदारी और भावनात्मक समझ की खूबसूरत व्याख्या है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और रिश्तों की अहमियत का एहसास भी कराती है। अगर आप संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘ना जाने कौन आ गया’ जरूर देखी जानी चाहिए।



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Fri, Mar 06 , 2026, 01:21 PM