नयी दिल्ली। केंद्र सरकार (central government) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लिए बातचीत जारी है लेकिन इस द्विपक्षीय समझौते की तारीख या समय के बारे में तब तक कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता जब तक कि बातें पूरी तरह तय न हो जाएं।
वाणिज्य उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Agrawal) ने दिसंबर, 2025 के निर्यात-आयात के आंकड़ों की जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी बाजार में भारत के सामानों पर शुल्क ऊंचा किये जाने के बावजूद बावजूद अमेरिका को भारत के निर्यात में सालाना आधार पर वृद्धि दिख रही है। उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बारे में एक सवाल पर कहा, ' दोनों पक्ष बातचीत में लगे हुए हैं... और दोनों पक्षों को लगता है कि एक समझौता हो सकता है।"
उन्होंने कहा कि समझौते के लिए दोनों पक्ष बराबर सम्पर्क में हैं। दोनों के बातचीत उच्च स्तर पर बातचीत भी हो रही है। गत दिसंबर में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई थी। दोनों और से वार्ता में शामिल अधिकारियों की टीमें भी वर्चुअली (वीडियो-कांफ्रेंसिंग) के जरिए लंबित विषयों पर बातचीत में लगी है। दोनों पक्षों के समझौते के करीब पहुंचने की बातों का उल्लेख किये जाने पर उन्होंने कहा कि जब तक बात पक्की न हो जाए तो उसे करीब क्या कहा जा सकता है।
अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका में ऊंचे शुल्क के बीच ' हम उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान लगा रहे हैं जहां शुल्क कम हैं, या जहां हमारे उद्योग मजबूत हैं और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में श्रम प्रधान कपड़ा और चमड़ा उद्योग के समक्ष चुनौतियों पर सरकार का ध्यान है। इसी संदर्भ में उन्होंने बाजार विविधीकरण के लिए किये जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
वाणिज्य सचिव ने एक प्रश्न पर कहा कि न्यूजीलैंड, ओमान और ब्रिटेन के साथ हुए तीन व्यापार समझौतों पर अमल इसी साल शुरू करने का प्रयास है। 'हम इन समझौतों को लागू करने के लिए आवश्यक नियम और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इनमें कुछ पक्षों (न्यूजीलैंड) को अपनी संसद से अनुमति लेने की आवश्कता हो सकती है। प्रयास है कि हम ये तीन एफटीए इसी साल लागू कर दें।"
उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बीच देश की निर्यातोन्मुख इकाइयों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (AEZ) के लिए रियायत और प्रोत्साहन देने की उपयोगिता के बारे में एक सवाल पर कहा कि 'इन क्षेत्रों की ओर से ऐसी मांगें सरकार के ध्यान में हैं और सरकार देख रही है कि वर्तमान दौर में इनके लिए क्या किया जा सकता है।'
यूरोपीय संघ के साथ मुक्त समझौते के इस माह गणतंत्र दिवस के आसपास हस्ताक्षर होने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच 24 में से 22 विषयों को तय कर लिया गया है। उन्होंने कहा, ' दोनों ओर से प्रयास है कि बातचीत के जरिए समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप दे दिया जाए ताकि हम (किसी भी उपयुक्त अवसर पर) उसकी घोषणा की स्थिति में हों।'
भारत के तेल आयात के बारे में वाणिज्य सचिव ने कहा कि देश अपने सभी पारंपरिक सप्लायर से खरीद रहा है, लेकिन ज्यादातर तेल पश्चिम एशिया से ही आता है। उन्होंने कहा, "हम इन दिनों अमेरिका से भी बहुत सारा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका से तेल का आयात बढ़ा है।"
ईरान से कारोबार करने पर अमेरिका में और ऊंचे शुल्क का सामना होने के जोखिम के बारे में एक सवाल पर श्री अग्रवाल ने कहा, 'ईरान के साथ हमारा व्यापार सीमित है। हम उसके साथ खाद्य और औषधियों जैसी कुछ मानवीय आवश्यकताओं वाली कुछ वस्तुओं का ही व्यापार कर रहे हैं।'उन्होंने कहा कि चीन को भारत से निर्यात में वृद्धि हुई है जो स्वागत योग्य है। पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र के देशों में भी भारत का निर्यात दिसंबर में तेजी से बढ़ा है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के निर्यात में वृद्धि बनी हुई है। दिसंबर में देश से वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात के सालाना आधार पर 1.88 प्रतिशत बढ़कर 38.51 अरब डॉलर और आयात 8.67 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 63.55 अरब डॉलर रहा। आज जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में अप्रैल से दिसंबर तक देश का कुल निर्यात 634.26 अरब डॉलर रहा। इसमें 4.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। वहीं आयात भी 4.95 फीसदी बढ़कर 730.84 अरब डॉलर रहा। इस प्रकार, कुल व्यापार घाटा 9.21 फीसदी की वृद्धि के साथ 96.58 अरब डॉलर रहा।
वाणिज्य सचिव ने कहा, ' आखिरी तिमाही में भी यही रुझान जारी रहा और कई नयी बाधाकारी चुनौती न खड़ी हुई तो इस वित्त वर्ष में हमारा कुल निर्यात 850 अरब डालर या उससे ऊपर पहुंच जाएगा। इसमें वस्तु निर्यात 450 अरब डालर और सेवाओं का निर्यात 400 अरब डालर के स्तर पर होगा। " उन्होंने कहा कि भारत से सेवाओं का निर्यात पहले की तरह मजबूत है। सेवा निर्यात के आने वाले समय में वस्तु निर्यात से ऊपर जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर श्री अग्रवाल ने कहा, 'हमारे लिए दोनों ही क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।"



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