नयी दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta) ने रविवार को रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर अफ़वाहें फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। श्रीमती गुप्ता ने कहा कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और नागरिकों को एलपीजी को लेकर घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने एलपीजी आपूर्ति (LPG supply) से जुड़ी चिंताओं पर जवाब देते हुए कहा कि अफ़वाहें फैलाना और लोगों में घबराहट पैदा करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि केंद्र और दिल्ली दोनों सरकारें पूरी ज़िम्मेदारी के साथ स्थिति पर नज़र रख रही हैं। उन्होंने कहा, "कुछ लोग बेवजह डर पैदा करने और जमाखोरी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय हित के ख़िलाफ़ है।" उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रही है। श्रीमती गुप्ता ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी व्यक्ति ग़लत जानकारी फैलाते हुए या किसी भी तरह की गड़बड़ी करते हुए पाया गया, तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा शनिवार को जारी एक आदेश के अनुसार, सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की दैनिक आपूर्ति को सामान्य खपत के लगभग 20 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत, दिल्ली में तीन तेल कंपनियों द्वारा सामान्य तौर पर बेचे जाने वाले लगभग 9,000 सिलेंडरों के औसत के मुकाबले 19 किलोग्राम क्षमता वाले लगभग 1,800 वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर रोज़ाना बांटे जाएंगे। यह नीति एक प्राथमिकता-आधारित आवंटन प्रणाली के तहत की गयी है, ताकि ज़रूरी सेवाओं को बिना किसी रुकावट आपूर्ति मिलती रहे।
शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे और हवाई अड्डों को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा गया है और उन्हें उनकी ज़रूरत का 100 प्रतिशत तक मिलेगा। सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों , रेस्तरां और खाने-पीने की जगहों, होटलों और हॉस्पिटैलिटी संस्थानों, डेयरियों, बेकरियों और कैटरर्स सहित अन्य क्षेत्रों को तय सीमा के अनुसार आपूर्ति मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि रोज़ाना का कोटा तीनों तेल कंपनियों के बीच उनके मार्केट शेयर के आधार पर बांटा जाएगा, जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को 58 प्रतिशत, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 27 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 15 प्रतिशत हिस्सा शामिल होगा।
आदेश में कहा गया है कि आपूर्ति मुख्य रूप से 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडरों में की जाएगी, जो कंपनियों के सॉफ्टवेयर सिस्टम में दर्ज बुकिंग अनुरोधों पर आधारित होगी। जिन मामलों में तुरंत सप्लाई संभव नहीं है, वहां आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर की जाएगी। इस बीच, अधिकारियों ने दावा किया है कि जमाखोरी, गलत इस्तेमाल और कालाबाज़ारी को रोकने के लिए, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग, दिल्ली पुलिस, विधिक माप विज्ञान विभाग और तेल कंपनियों के अधिकारियों वाली संयुक्त प्रवर्तन टीमों को निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान चलाने के लिए तैनात किया गया है।
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