पटना। राज्य में स्लीपर बसों के संचालन, निर्माण और संशोधन को लेकर परिवहन मंत्री श्रवण कुमार (Shravan Kumar) ने सख्त दिशा- निर्देश जारी करते हुये उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्लीपर बसों (sleeper buses) का निर्माण, निरीक्षण और संचालन केवल निर्धारित ऑटोमोबाइल सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही किया जा सकेगा और नियमों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जायेगा। परिवहन विभाग (Transport Department) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में कटिहार भ्रमण के दौरान प्राप्त शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आया है कि कई बसें सीटर के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद अवैध रूप से मिक्स्ड सीटर-स्लीपर कॉन्फिगरेशन में संचालित की जा रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह कड़े दिशा- निर्देश जारी किये गये हैं।
इस संबंध में मंत्री श्री कुमार ने बताया कि सभी स्लीपर बसों में आपातकालीन निकास, निर्धारित बर्थ आकार (1800 मिमी लंबाई व 600 मिमी चौड़ाई), फायर रेसिस्टेंट सामग्री और बस के प्रोटोटाइप का मान्यता प्राप्त जांच एजेंसी से प्रमाणन अनिवार्य होगा। साथ ही फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट जारी करने से पहले वाहन की वास्तविक बॉडी कॉन्फिगरेशन की भौतिक जांच भी की जायेगी। उन्होंने बताया कि कई ओवरनाइट बसें बिहार से अंतरराज्यीय रूटों पर एसी सीटर परमिट के बावजूद मॉडिफाइड स्लीपर बस के रूप में चलाई जा रही हैं। इससे आग लगने, ओवरलोडिंग और आपातकालीन निकास बाधित होने जैसी गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से कटिहार– सिलीगुड़ी रूट पर ऐसी बसें पाये जाने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है।
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई सीटर बस स्लीपर में परिवर्तित पाई जाती है, तो उसका परमिट तत्काल रद्द किया जायेगा। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ऑपरेटरों, संबंधित आरटीओ अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।
हाल के दिनों में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुये राज्य सरकार ने नये और सख्त नियम लागू किये हैं। अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत फैक्टरियों में ही किया जायेगा। स्थानीय या अनाधिकृत बॉडी बिल्डरों को स्लीपर कोच बनाने की अनुमति नहीं होगी।
हर स्लीपर बस में फायर डिटेक्शन सिस्टम अनिवार्य किया गया है। साथ ही ड्राइवर की नींद या थकान का पता लगाने के लिये एआई आधारित सेंसर और ड्राउजिनेस अलर्ट सिस्टम लगाना भी जरूरी होगा। ड्राइवर के झपकी लेते ही अलार्म बजकर तुरंत चेतावनी देगा। इसके अलावा बसों में इमरजेंसी एग्जिट हैमर, इमरजेंसी लाइट्स, स्पष्ट चिन्हित निकास द्वार और मल्टी-पॉइंट एग्जिट सिस्टम भी अनिवार्य किये गये हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से संचालित स्लीपर बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की रेट्रोफिटिंग कराई जायेगी। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, एग्जिट हैमर और ड्राइवर ड्राउजिनेस अलर्ट सिस्टम शामिल होंगे। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि इन सख्त नियमों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।



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