The Raja Saab Review: प्रभास की द राजा साब, हॉरर-फैंटेसी है जो डर के साथ दिल को भी छूती है! राजू के किरदार में छ गए हैं प्रभास  

Sat, Jan 10 , 2026, 12:47 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

कलाकार: प्रभास, संजय दत्त, बोमन ईरानी, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, रिद्धि कुमार, ज़रीना वहाब, समुथिरकानी 
निर्देशक: मारुति दासारी 
निर्माता: टी. जी. विश्वा प्रसाद 
प्रोडक्शन हाउस: पीपल मीडिया फ़ैक्ट्री 
अवधि: 3 घंटे 06 मिनट , सेंसर : यू/ए 
रिलीज़ तिथि: 09 जनवरी 2026 
रेटिंग : 3

कहानी 
फ़िल्म की कहानी दक्षिण भारत के एक गांव से शुरू होती है जहाँ आर राजू ( Prabhas) अपनी दादी (Zarina Wahab) के साथ बहुत ही गरीबी में रहता है। हालाकि वह कई सालों पहले बहुत अमीर खानदान के थे। राजू (प्रभास) एक मस्ती-मिज़ाज लेकिन दिल से बेहद जुड़ा हुआ युवक है, जिसकी दुनिया उसकी दादी गंगादेवी (ज़रीना वहाब) के इर्द-गिर्द घूमती है। कभी एक प्रतिष्ठित ज़मींदार परिवार की मुखिया रहीं गंगादेवी आज बीमारी और अकेलेपन से जूझ रही हैं। उनकी हालत उस दिन से बिगड़ती चली गई, जब एक पवित्र देवी का हार चोरी हुआ और उनके पति कनकराजू (Sanjay Dutt) उसे ढूँढने निकले—लेकिन फिर कभी लौटे नहीं। 

डॉक्टरों की मान्यता है कि यदि गंगादेवी अपने पति को दोबारा देख लें, तो उनकी स्मृति और स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। इसी उम्मीद के साथ राजू अपने लापता दादा की तलाश में हैदराबाद का रुख करता है। यह तलाश केवल एक व्यक्ति को खोजने की नहीं रहती, बल्कि राजू को धीरे-धीरे अपने परिवार के अतीत, छिपे हुए काले रहस्यों और अधूरे सच से रू-बरू कराती है। अनीता (रिद्धि कुमार) और भैरवी (मालविका मोहनन) उसकी इस यात्रा में भावनात्मक मोड़ लेकर आती हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, संजय दत्त का फ्लैशबैक ट्रैक फ़िल्म को एक नई गंभीरता देता है, जहाँ टकराव सिर्फ़ शारीरिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक स्तर पर बदल जाता है। यह कहानी वर्तमान और भूतकाल, अच्छाई - बुराई के में बीच में हो रही है। 

अभिनय 
प्रभास ने राजू के किरदार में अपने अभिनय को पर्दे पर शानदार तरीके से उकेरते है। वे संवादों से ज़्यादा अपनी मौजूदगी और शांत भावनाओं के ज़रिए किरदार को गहराई देते हैं। ज़रीना वहाब के साथ उनके अस्पताल वाले दृश्य फ़िल्म के सबसे भावुक पलों में गिने जाते हैं, जहाँ खामोशी ही सबसे बड़ा संवाद बन जाती है। संजय दत्त का किरदार केवल एक विलेन नहीं, बल्कि अतीत के घावों और नैतिक पतन का प्रतीक बनकर सामने आता है। उनके फ्लैशबैक दृश्य डर और गंभीरता के साथ दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। संजय दत्त का गेट अप इस फ़िल्म का हाईलाइट है। दर्शक लंबे समय तक इस लुक को याद रखेंगे। बोमन ईरानी एक अहम मोड़ पर कहानी को मजबूती देते हैं। एक हिप्नोटिज्म एक्सपर्ट और भूत प्रेतों को नियंत्रित करने वाली भूमिका के साथ उन्होंने न्याय किया है। 

निर्देशन 
मारुति दासारी (Maruthi Dasari) का निर्देशन संतुलन का उदाहरण है। वे हॉरर, फैंटेसी और इमोशन को बिना शोर-शराबे के साधते हैं। इंटरवल के आसपास आने वाला टर्निंग पॉइंट कहानी को नई दिशा देता है और दर्शक दूसरे हिस्से को लेकर उत्सुक हो जाते हैं। फ़िल्म के अंतिम 40 मिनट इंटरनेशनल-लेवल विज़ुअल्स के साथ एक भव्य अनुभव रचते हैं, और इस भव्यता से अप, ग्रैंड विज़ुअल्स के बीच में फ़िल्म इमोशनली आपको कनेक्ट रखती है। 

‘द राजा साब’ एक ऐसी हॉरर-फैंटेसी है जो डर के साथ दिल को भी छूती है। फ़िल्म का प्री–क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स सबसे मज़बूत हिस्सा है। फ़िल्म की लबाई थोड़ी अधिक है लेकिन भव्य सेट डिज़ाइन और उच्च–स्तरीय VFX इसे जादुई और रहस्यमयी बनाते  हैं। अंतिम 30 मिनट और क्लाइमेक्स दृश्यों में फ़िल्म बहुत ही लाजवाब लगती  है, फ़िल्म में वी एफ़ एक्स का उन्नत और बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया है। दमदार अभिनय, पारिवारिक भावनाएँ, एडवेंचर और विज़ुअल ट्रीट के लिए यह फ़िल्म बड़े पर्दे पर देखी जा सकती है।

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