नयी दिल्ली : स्वास्थ्य बीमा में चूक (period for health insurance defaults) के लिए प्रीमियम अवधि बढ़ाकर 90 दिन करने और चूक के बावजूद बीमा कवर के लाभ स्थायी रूप से समाप्त न करने की मांग गुरुवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में उठायी गयी। महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की फौजिया खान ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि बीमा प्रीमियम भरने में एक चूक होने पर वर्षों से समय पर प्रीमियम भरकर अर्जित सभी लाभ शून्य हो जाते हैं। कंपनियां नये सिरे से बीमा लाभ शुरू करती हैं और कई मौकों पर दुबारा मेडिकल कराने के लिए भी कहा जाता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण को निर्देश दे कि स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए रियायत अवधि 30 दिन से बढ़ाकर 90 दिन की जाये। साथ ही प्रीमियम न भरने की स्थिति में पूर्व में अर्जित लाभ सिर्फ अस्थायी तौर पर निलंबित होने चाहिये और भुगतान के 180 दिन के भीतर सभी लाभ पुनर्स्थापित हो जाने चाहिये।
गुजरात से कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लीलता का मुद्दा उठाते हुए सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने और इस संबंध में सख्त कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आज-कल बच्चे भी स्मार्टफोन चलाते हैं। उन्हें इससे दूर करने के लिए कर्नाटक की तर्ज पर कानून बनाया जाना चाहिये।
बिहार से राजद सांसद मनोज कुमार झा ने महाभारत की पटकथा लिखने वाले लेखक एवं स्क्रिप्ट राइटर राही मासूम रजा के सम्मान में स्मारक डाट टिकट जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 'आधा गांव', 'टोपी शुक्ला' जैसी अपनी रचनाओं से श्री रजा ने समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य दूर करने का प्रयास किया। कर्बला के बार में यदि उन्हें पढ़ा जाये तो यह आज के परिप्रेक्ष्य में ईरान को समझने में मददगार हो सकती है। जम्मू-कश्मीर से नेशनल कांफ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान ने कश्मीरी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सदियों पुरानी भाषा है जो संस्कृति और ज्ञान का भंडार है। केंद्र शासित प्रदेश में 75 प्रतिशत लोग कश्मीरी समझते और लिखते हैं। शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से इस भाषा के और विकास में मदद मिलेगी, इसमें उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जा सकेगा और कश्मीरी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
मध्य प्रदेश से भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी ने आदिवासियों की जमीन के अधिग्रहण पर मुआवजे का मुद्दा उठाते हुए उन्हें उचित मुआवजा और उचित पुनर्वास देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं समावेशी विकास के पक्षधर रहे हैं। इसलिए, आदिवासियों की जमीन लेने पर उन्हें सरकारी दर की तुलना में छह गुना मुआवजा दिया जाना चाहिये और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी बनायी जानी चाहिये। महाराष्ट्र से शिव सेना के मिलिंद देवडा ने बढ़ते शहरीकरण को समस्या की बजाय अवसर बनाने के लिए शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की मांग की।
भाजपा के नबाम रेबिया ने अरुणाचल प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की ताकि राज्य की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के अन्य सभी राज्य छठी अनुसूची में शामिल हैं और सिर्फ अरुणाचल को इससे बाहर रखा गया है जबकि वहां अनुसूचित जनजाति वर्ग की बड़ी आबादी है। उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने बिहार के बौद्ध गया में बौद्ध गया मंदिर प्रबंधन समिति में उसी धर्म के लोगों को प्रतिनिधित्व देने और गया हवाई अड्डे का नाम महात्मा बुद्ध के नाम पर रखने की मांग की।
बिहार से राजद के ए.डी. सिंह ने उपकर के पैसे का केंद्र सरकार द्वारा अवैध रूप से दूसरे मदों में इस्तेमाल करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कैग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कई मदों में संकलित उपकर का उस मद से इतर इस्तेमाल किया गया है। बिहार से भाजपा के भीम सिंह ने बढ़ई, कुम्हार और लोहार समाजों की समस्या उठाते हुए कहा कि वे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और पारंपरिक काम को छोड़ने के लिए विवश हैं। उन्होंने सरकार से इन वर्गों के लोगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज, प्रशिक्षण और सस्ते ऋण की व्यवस्था करने तथा उनके कल्याण के लिए राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड के गठन की मांग की।



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Thu, Apr 02 , 2026, 02:08 PM