India Supports: भारत ने डब्ल्यूटीओ सम्मेलन में मत्स्य समझौते के मसौदे को अपनाने का समर्थेन किया

Sat, Mar 28 , 2026, 08:52 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक (draft agreement) में मत्स्य पालन क्षेत्र में सब्सिडी की कटौती पर समझौते के मसौदे को समर्थन दिया है, पर उसके साथ समग्र समझौते पर भविष्य की दृष्टि से संतुलित और जन-केंद्रित (छोटे मछुआरों) पर केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाये जाने पर बल दिया है। कैमरून के याउंडे में 26-29 मार्च तक आयोजित इस बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोगों के लिए मछली पकड़ने का काम आजीविका और खाद्य सुरक्षा का मुख्य जरिया है। श्री गोयल ने मत्स्य व्यापार के बारे में रखे गये मसौदे को लेकर बैठक में भारत के सहयोग का भरोसा दिया पर कहा कि समझौता ऐसा होना चाहिए, जिससे -समुद्री संसाधनों की हिफाजत भी हो और गरीब मछुआरों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।

श्री गोयल ने मत्स्यपालन क्षेत्र में सब्सिडी कटौती पर बैठक में भारत के दृष्टिकोण पर अपनी प्रस्तुति के बारे में एक्स पर लिखा, “ मैंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में मत्स्य पालन आजीविका और खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो 90 लाख से अधिक मछुआरों को सहारा देता है।" भारत का कहना है कि देश में मछली पकड़ने के काम में लगे अधिकतर लोग छोटे स्तर पर काम करने वाले, पारंपरिक और कुशल मछुआरे हैं, जो उचित तरीकों से मछली पकड़ने का काम करते हैं। भारत में मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए परंपरागत रूप से सक्रिय और स्वस्थ उपाय किये जाते हैं। हर साल एक ऐसी अवधि में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है, जब मछलियां अंडे देने वाली होती हैं। भारत में मत्स्य पालन का प्राकृतिक रूप से स्वस्थ तरीका भारत की परंपरा है और सदियों से चल रहा है जबकि कि यह कोई वैश्विक प्राथमिकता भी नहीं बना था।

वाणिज्य मंत्री ने कहा, “ मैंने इस बात को रेखांकित किया कि अत्यधिक क्षमता और अत्यधिक मछली पकड़ने की चुनौती भारी सब्सिडी वाले औद्योगिक बेड़ों से उत्पन्न होती है, न कि भारत और अन्य विकासशील देशों के छोटे पैमाने के मछुआरों से। मैंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि लिए जाने वाले नये निर्णय निष्पक्ष हों और उनका कमज़ोर समुदायों पर असंतुलित प्रभाव न पड़े।” गोयल ने कहा, “ मैंने मसौदा निर्णय को अपनाने के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया, साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भविष्य के निर्णयों से ऐसे न्यायसंगत और विकास-उन्मुख परिणाम मिलने चाहिए जो समुद्री संसाधनों और आजीविका, दोनों की रक्षा करें।”

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