न्यूयॉर्क। अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (Congressional Research Service) की एक नयी रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक बार फिर विभिन्न आतंकवादी संगठनों के प्रमुख ठिकाने के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय अल-कायदा से लेकर भारत-केंद्रित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान 1980 के दशक से सक्रिय अनेक सशस्त्र गैर-राज्य तत्वों के लिए संचालन का आधार बना हुआ है। इन्हें व्यापक रूप से वैश्विक, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत और कश्मीर केंद्रित, घरेलू तथा सांप्रदायिक (anti-Shia) संगठन सहित पांच श्रेणियों में बांटा गया है।
पहचाने गए 15 संगठनों में से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया है, जिनमें अधिकांश इस्लामी उग्रवादी विचारधारा से प्रेरित हैं।
सीआरएस के अनुसार, एलईटी और जेईएम जैसे कई भारत विरोधी संगठन अब भी सक्रिय हैं और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों से संचालित होते हैं। इन संगठनों का संबंध 2008 के मुंबई आतंकी हमलों और 2001 में भारतीय संसद पर हमले जैसे बड़े हमलों से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर घरेलू आतंकवाद का सामना करने के बावजूद पाकिस्तान इन नेटवर्कों को समाप्त करने में संघर्ष कर रहा है। आतंकवाद से संबंधित मौतों की संख्या 2019 में 365 से बढ़कर 2025 में 4,001 तक पहुंच गयी है, जो एक दशक में सबसे अधिक है। यह हिंसा मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, खासकर अफगानिस्तान सीमा के आसपास केंद्रित है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार के कई सैन्य अभियानों और खुफिया कार्रवाई के बावजूद अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित कई आतंकी संगठन अब भी उसके क्षेत्र में सक्रिय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की 'कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म 2023' में यह स्वीकार किया गया है कि पाकिस्तान ने आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए "कुछ कदम" उठाए हैं, लेकिन कट्टरपंथीकरण को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कुछ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को भी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला बताया गया है। वहीं, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और भारत पर अपने पश्चिमी प्रांतों में विद्रोही गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाता है। भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
सीआरएस के आकलन में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रांत (ISKP) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ-साथ अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे क्षेत्रीय समूहों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है, जिनके पाकिस्तान से संबंध या संचालन के लिंक रहे हैं। आतंक वित्तपोषण के मोर्चे पर भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठे हैं। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने 2018 में उसे "ग्रे लिस्ट" में डाला था, जिसे आवश्यक सुधार पूरे करने के बाद 2022 में हटाया गया। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और समय-समय पर कार्रवाई के बावजूद पाकिस्तान एक ओर आतंकवाद से प्रभावित देशों में शामिल है। वहीं दूसरी ओर वह कई क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकी संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।



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