How Thyroid Affects Entire Body: जानिए थायराइड पूरे शरीर पर कैसे असर डालता है? पहचानिए इसके लक्षण; जानिए इसके कितने प्रकार होते हैं?

Fri, Mar 13 , 2026, 09:50 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

How Thyroid Affects Entire Body: थायराइड आपकी गर्दन के सामने तितली के आकार की एंडोक्राइन ग्लैंड होती है। यह ग्लैंड भले ही छोटी लगे, लेकिन शरीर में रिमोट कंट्रोल की तरह काम करती है। 'अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 12% लोग अपनी ज़िंदगी में थायराइड की समस्या का सामना करते हैं।

थायराइड पूरे शरीर पर कैसे असर डालता है?
'द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी' की एक हालिया स्टडी के मुताबिक, भारत में महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले तीन गुना ज़्यादा थायराइड होता है। यह ग्लैंड 'थायरॉक्सिन' (T4) और 'ट्राईआयोडोथायरोनिन' (T3) हॉर्मोन बनाती है।

  • जो हमारे हार्ट रेट को कंट्रोल करते हैं
  • बॉडी टेम्परेचर
  • खाने को एनर्जी में बदलने का प्रोसेस (मेटाबॉलिज्म)

जब ये हॉर्मोन बैलेंस में नहीं होते हैं, तो यह न सिर्फ़ फिजिकल एनर्जी बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी असर डालता है। थायराइड की समस्या हमारे शरीर की पूरी रिदम को बदल देती है।

थायरॉइड क्या है और इसके मुख्य प्रकार
थायरॉइड एक ग्लैंड है, कोई बीमारी नहीं; लेकिन, जब यह ठीक से काम नहीं करता, तो बीमारियाँ होती हैं।

इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
हाइपोथायरॉइडिज़्म
इसमें ग्लैंड कम हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर की एक्टिविटी धीमी हो जाती है। इससे वज़न बढ़ता है और थकान होती है। जब थायरॉइड ग्लैंड शरीर के लिए ज़रूरी हार्मोन नहीं बना पाती, तो इसे 'हाइपोथायरॉइडिज़्म' कहते हैं। जैसे बैटरी सेल्स से चलती है, और जब उसके सेल्स खत्म हो जाते हैं, तो हाइपोथायरॉइडिज़्म बैटरी जैसी ही एक बीमारी है।

हाइपरथायरॉइडिज़्म
इसमें ग्लैंड ज़रूरत से ज़्यादा हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर की एक्टिविटी तेज़ हो जाती है, जैसे वज़न कम होना और दिल की धड़कन बढ़ना। अगर थायरॉइड ग्लैंड ज़रूरत से ज़्यादा काम कर रही है, तो इसे 'हाइपरथायरॉइडिज़्म' कहते हैं।

तीसरा प्रकार 
थायरॉइड ग्लैंड में सूजन। इसे गॉइटर कहते हैं। अगर यह बीमारी दवा से ठीक नहीं होती है, तो सर्जरी की ज़रूरत होती है।

‘हाशिमोटो’ और ‘ग्रेव्स डिज़ीज़’ जैसे ऑटो-इम्यून टाइप भी बहुत ज़्यादा पाए जाते हैं, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम इस ग्लैंड पर हमला करता है।

थायरॉइडाइटिस क्यों और कैसे होता है?
थायरॉइडाइटिस के पीछे कई साइंटिफिक कारण हैं। ‘हार्वर्ड हेल्थ’ की रिसर्च के अनुसार,

आयोडीन की कमी या ज़्यादा होना इसका सबसे बड़ा कारण 
बहुत ज़्यादा मेंटल स्ट्रेस (Stress) थायरॉइड के काम में रुकावट डालता है, क्योंकि स्ट्रेस ‘कॉर्टिसोल’ को बढ़ाता है जो थायरॉइड हार्मोन को ब्लॉक करता है।

  • जेनेटिक्स
  • बच्चे के जन्म के बाद हार्मोनल बदलाव
  • एंडोक्राइन को खराब करने वाले केमिकल: ये उन कई प्रोडक्ट्स में छिपे होते हैं जिन्हें हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं और थायरॉइड ग्लैंड की हार्मोन बनाने और काम करने की नैचुरल क्षमता को बिगाड़ सकते हैं, जिससे एनर्जी, ग्रोथ और ब्रेन डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है।
  • सोया या प्रोसेस्ड फ़ूड का ज़्यादा सेवन
  • शरीर में सेलेनियम और ज़िंक जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी
  • ऊपर बताए गए कारण थायरॉइड की खराबी का कारण बन सकते हैं।

थायरॉइड के लक्षण और संकेत
थायरॉइड के लक्षण टाइप के हिसाब से अलग-अलग होते हैं, लेकिन कुछ आम संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार:

हाइपोथायरायडिज्म से ये लक्षण हो सकते हैं:

  • बिना वजह वज़न बढ़ना
  • हर समय थकान महसूस होना
  • बाल झड़ना
  • स्किन का रूखा होना
  • बहुत ज़्यादा ठंड लगना
  • कब्ज़
  • चेहरे और पैरों में सूजन
  • कमज़ोरी महसूस होना
  • आलस आना
  • भूख न लगना
  • बहुत ज़्यादा नींद आना
  • महिलाओं में पीरियड्स की दिक्कतें
  • बाल झड़ना
  • इनफर्टिलिटी

अगर थायरॉइड ग्लैंड ज़रूरत से ज़्यादा काम कर रहा है, तो इसे ‘हाइपरथायरायडिज्म’ कहते हैं। थायरॉइड का तीसरा टाइप है थायरॉइड ग्लैंड में सूजन। इसे गॉइटर कहते हैं। अगर यह बीमारी दवा से ठीक न हो, तो सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन थायरॉइड कोई बीमारी नहीं, बल्कि हॉर्मोन्स का खेल है जिसे सही डाइट, लाइफस्टाइल में छोटे-मोटे बदलाव और एक्सरसाइज़ से कंट्रोल किया जा सकता है।

ये थायरॉइड की खराबी के बड़े लक्षण हो सकते हैं:

  • अचानक वज़न कम होना
  • दिल की धड़कन तेज़ होना
  • हाथ-पैर कांपना
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • चिड़चिड़ापन बढ़ना
  • डायरिया
  • चिंता बढ़ना
  • हाथ-पैर कांपना
  • बहुत ज़्यादा हॉट फ्लैशेस
  • मूड में बहुत ज़्यादा बदलाव
  • स्लीप एपनिया
  • स्लीप एपनिया
  • दिल की धड़कन धीमी होना
  • धुंधली नज़र
  • मानसिक धुंध  

अगर आपको थायरॉइड की बीमारी है तो क्या करें?
थायरॉइड की बीमारी का पता चलने के बाद, बिना घबराए सोच-समझकर कदम उठाना ज़रूरी है।

मेडिकल इलाज
डॉक्टर 'TSH, T3, T4' के लिए ब्लड टेस्ट करके दवाओं की डोज़ तय करते हैं। ये दवाएं आमतौर पर खाली पेट लेनी होती हैं।

रेगुलर चेक-अप
दवाओं की डोज़ सही है या नहीं, यह देखने के लिए हर 3 से 6 महीने में ब्लड टेस्ट ज़रूरी है।

नेचुरल इलाज
हालांकि थायरॉइड को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है, लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है ताकि शरीर पर इसका कोई बुरा असर न हो।

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