मुंबई: वित्तीय वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (Economic Survey Report) में अनुमान लगाया गया है कि महाराष्ट्र भारत की सबसे मजबूत और गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। राज्य की विकास दर 7.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो कि 7.4 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक है। सर्वेक्षण के अनुसार, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में सकारात्मक वृद्धि के कारण मौजूदा कीमतों पर राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जिएसडीपी) 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह और अनुकूल मूल्य स्थितियों के सहयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था लगातार पांचवें वर्ष अपनी विकास गति बनाए रख सकती है। सर्वेक्षण ने हालांकि ध्यान दिलाया कि दिसंबर 2025 तक राज्य ने 3,71,575 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया था, जो कि 5,60,964 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य का 66.2 प्रतिशत है। यानी अंतिम तिमाही में अभी भी लगभग 33.8 प्रतिशत राजस्व जुटाना बाकी है।
सेवा क्षेत्र नौ प्रतिशत की अपेक्षित वृद्धि के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है, इसके बाद उद्योग क्षेत्र में 5.7 प्रतिशत और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। सर्वेक्षण में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3,47,903 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जो 2,19,575 रुपये के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। वहीं, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान महंगाई अपेक्षाकृत कम रही, जो ग्रामीण क्षेत्रों में दो प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 1.5 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 270.84 लाख राशन कार्ड धारक हैं और लगभग 1.55 करोड़ परिवारों ने आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त किया है। 'शिव भोजन थाली' योजना के तहत नवंबर 2025 तक 1,874 केंद्रों के माध्यम से 4.09 करोड़ से अधिक रियायती भोजन परोसे गए। कृषि क्षेत्र में, इस मानसून के दौरान वर्षा औसत की 109.1 प्रतिशत रही, हालांकि फसलों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। गन्ने के उत्पादन में 22 प्रतिशत और कपास में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दालों के उत्पादन में 28.2 प्रतिशत और तिलहन में 47.4 प्रतिशत की गिरावट आई।
राज्य सरकार ने बेमौसम बारिश से प्रभावित लगभग 1.2 करोड़ किसानों के लिए आपदा राहत सहायता के रूप में 9,360 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र का 20.2 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वनों के अधीन है। राज्य 14,525 वर्ग किमी के 'वृक्ष आवरण' के साथ देश में पहले स्थान पर है, इसके अलावा भारत के मैंग्रोव वनों का 6.3 प्रतिशत हिस्सा भी इसी राज्य में है।



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