Jammu and Kashmir Students' Association: जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने विदेश मंत्री को लिखा अनुरोध पत्र, आर्मेनिया सीमा के रास्ते छात्रों को निकालने की मांग की!

Fri, Mar 06 , 2026, 08:05 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने गुरुवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर उत्तर-पश्चिमी ईरान के उर्मिया शहर में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया है। छात्र संघ ने जयशंकर से अनुरोध किया है कि फंसे हुए छात्रों को आर्मेनिया सीमा के रास्ते बाहर निकालने में मदद की जाए। 

संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने एक बयान में कहा कि वे उर्मिया विश्वविद्यालय में पढ़ रहे कई भारतीय और कश्मीरी छात्रों के साथ लगातार संपर्क में हैं। छात्रों ने बताया है कि उनके रहने वाली जगह के पास बार-बार हो रहे धमाकों और हवाई हमलों के कारण सुरक्षा की स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई है। छात्रों के अनुसार उनके छात्रावास के बेहद करीब कई धमाके हुए हैं, जिनमें से एक धमाका लड़कों के छात्रावास से महज 300 मीटर की दूरी पर हुआ। धमाके इतने तेज थे कि आसपास की इमारतें हिल गईं, जिससे छात्र काफी डरे हुए और परेशान हैं।

कई छात्रों ने दिन-रात लड़ाकू विमानों और हवाई सुरक्षा प्रणालियों की गूंज सुनाई देने की बात कही है, जिससे हर समय डर और अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। खुहामी ने बताया कि स्थिति इसलिए भी नाजुक है क्योंकि आसपास के इलाकों में सेना के ठिकाने और हवाईअड्डे हैं, जिन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "सुरक्षा के गिरते स्तर को देखते हुए हमने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से आग्रह किया है कि उर्मिया में फंसे भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के जमीनी रास्ते से निकालने की व्यवस्था की जाए।

फिलहाल सुरक्षित निकलने के लिए यही रास्ता सबसे आसान और सही लग रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि आर्मेनिया भौगोलिक रूप से उर्मिया के करीब है और पिछले साल ईरान-इजरायल के बीच हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान भी इस रास्ते का इस्तेमाल किया गया था। वहां पहुंचकर छात्र व्यावसायिक उड़ानों के जरिए भारत लौट सकते हैं। संघ ने विदेश मंत्रालय को यह जानकारी भी दी है कि फंसे हुए छात्र जरूरत पड़ने पर अपनी यात्रा का खर्च खुद उठाने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें भारत सरकार की ओर से राजनयिक मदद की सख्त जरूरत है।

खुहामी ने बताया, "छात्रों को मुख्य रूप से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास से औपचारिक अनुमति पत्र की जरूरत है, ताकि वे आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित रूप से पड़ोसी देश की सीमा पार कर सकें।" छात्र संघ ने भारत सरकार से अपनी अपील दोहराते हुए कहा है कि हालात और ज्यादा बिगड़ने से पहले जमीनी स्थिति का जायजा लेकर छात्रों को सुरक्षित निकालने का रास्ता जल्द से जल्द तैयार किया जाए।

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