नयी दिल्ली। केंद्रीय राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव (Arvind Srivastava) ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) में ऐसे बुनियादी सुधार पेश किए गए हैं जो करदाताओं को ज़्यादा आज़ादी देंगे और करअधिकारियों के साथ उनका आमना सामना कम होगा। बजट पर उद्योगमंडल फिक्की की ओर से आयोजित परिचर्चा में शामिल उद्योगपतियों और व्यवसायियों को संबोधित करते हुए राजस्व सचिव ने कहा कि ये सुधार करदाताओं में सरकार के भरोसे को दर्शाते हैं।उन्होंने कहा, "इसके पीछे मूल विचार यह है कि हमारा मानना है कि करदाता सामान्य रूप से ईमानदारी से कर भुगतान करना चाहते हैं, बशर्ते वे उसे सही समझते हों।"
बजट में रिटर्न में संशोधन करने के लिए तीन का समय और दे दिया गया है और कर विवरण को चार साल तक अद्यतन करने की अनुमति दी गयी है। जहां आकलन की कार्यवाही शुरू हो गई है, वहां भी करदाता अपने दाखिलों को ताजा कर सकता है और अद्यतन विवरण ही आकलन और जांच का आधार बनेगा। उन्होंने बताया कि जब से कर विवरण को अद्यतन करने की सुविधा दी गयी है, 1.22 करोड़ करदाताओं ने ने स्वेच्छा से अपने विवरण में सुधार किये हैं, जिससे सरकार को 13,500 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार अधिकृत आर्थिक परिचालनकर्ता योजना के तहत अप्रत्यक्ष कर लाभों का विस्तार कर रही है। सचिव श्रीवास्तव ने ज़ोर दिया कि डेटा केंद्रों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में सुधारों का उद्देश्य एक समान अवसर प्रदान करना है ताकि कर व्यवस्था के चलते घरेलू उद्योगों को नुकसान न पहुंचे। कार्यक्रम में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की व्यापक स्तर पर मजबूती का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले वित्त वित्त वर्ष में कर्ज-जीडीपी अनुपात 56.1 प्रतिशत से घटकर 55.6 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत है।
उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो उद्योग की एक लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे अब बजट में पूरा किया गया है। छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़ी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक मुख्य हिस्सा बताते हुए सुश्री ठाकुर ने कहा कि उन्हें मदद की समर्थन की एक अलग श्रेणी के रूप में 10,000 करोड़ का एक विशेष कोष बनाया गया है। व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने वित्तीय समझदारी और पूंजीगत खर्च के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "वित्तीय अनुशासन और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता पर यह ज़ोर, जिसे हम न सिर्फ मौजूदा समय में बल्कि पिछले कई सालों से बनाए रखने में कामयाब रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को पूजीगत खर्च के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI)के तहत पूंजी निवेश के लिए राज्यों को दी जाने वाली सहायता बढ़ाकर 2 लाख करोड़ कर दी गई है, जिसमें उन राज्यों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा जो अपने संसाधनों से पूंजीगत खर्च में सालाना 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं। उन्होंने उत्पादक निजी-सरकारी भागीदारी की पहल के लिए बजट में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी पहल का ज़िक्र किया। वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने बताया कि बैंकों के ऋण कारोबार में 12 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। सूक्षम, लघु ,मझोले उद्यामों को बैंकों से मिलने वाला कर्ज सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। बैंकों की अवरुद्ध परिसम्पत्तियां घटकर 0.45 प्रतिशत हो गए हैं, जो इसका अब तक का न्यूनतम स्तर है।



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Tue, Feb 03 , 2026, 09:59 PM