नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने इस बार के बजट में व्यक्तिगत आयकर की दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है लेकिन कहा है कि 01 अप्रैल 2026 से लागू किये जा रहे नये आयकर अधिनियम 2025 में नियमों और प्रक्रियाओं को आसान बनाया जायेगा। श्रीमती सीतारमण ने रविवार को अपने बजट भाषण में कहा कि आयकर के नये सरलीकृत नियम और फॉर्म जल्द ही जारी किये जायेंगे और करदाताओं को उनसे परिचित होने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
वित्त मंत्री ने लोगों की जिंदगी में आसानी के लिए किसी व्यक्ति के संबंध में मिलने वाले मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा घोषित मुआवजे को आयकर और स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के मुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने विदेशी भ्रमण के लिए पैकेज टूर की योजनाओं की बिक्री पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) को घटाकर दो प्रतिशत करने की घोषणा की जो इस समय पांच प्रतिशत और 20 प्रतिशत है। उन्होंने विदेशों से धन भेजने की उदार योजना (LRS) में टीसीएस की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया है जिससे शिक्षा, इलाज या सैर-सपाटे के लिए इस योजना के तहत सीमित धन को भेजना सस्ता होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि मानव संसाधन आपूर्ति की सेवाओं के मामले में श्रम की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार को किये गये भुगतान पर ही टीडीएस की कटौती की जायेगी। कटौती की दर एक या दो प्रतिशत होगी। कई कंपनियों की प्रतिभूतियां रखने वाले करदाताओं की आसानी के लिए डिपॉजिटरी सेवा प्रदाताओं को करदाता से फॉर्म 15जी और 15एच प्राप्त कर संबंधित कंपनियों को प्रेषित करने का अधिकार देने की घोषणा की गयी। उन्होंने कर रिटर्न को संशोधित के लिए समय को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दिया है और इसके लिए करदाता को छोटी फीस चुकानी पड़े। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले व्यक्तियों को पहले की तरह 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। इसी तरह ऐसे कारोबारी और ट्रस्ट 31 अगस्त तक की वर्तमान सीमा के अंदर ही रिटर्न भर सकेंगे। इन्हें ऑडिट की औपचारिकता पूरी नहीं करनी होगी।
कोई विदेश में रह रहा व्यक्ति भारत में अपनी भू-संपत्ति बेचता है तो उस पर टीडीएस काटने और जमा कराने की जिम्मेदारी घरेलू खरीददार की होगी और वह खरीददार के पैन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों, युवा पेशेवरों, टेक कंपनियों के कर्मचारियों, विदेशों से लौटे प्रवासी भारतीयों और ऐसे अन्य लोगों को अपनी विदेश की संपत्ति की घोषणा के लिए छह महीने की योजना की घोषित की है। इसके तहत, एक सीमित राशि की संपत्तियों की घोषणा की जा सकती है। इसमें दो श्रेणियां हैं - पहली, जिन्होंने ऐसी संपत्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और दूसरी, ऐसे लोग जिन्होंने अपनी विदेशी आय पर कर का भुगतान किया है लेकिन विदेशी संपत्ति की जानकारी नहीं दी है।
श्री सीतारमण ने कहा कि पहले वर्ग में आने वाले एक करोड़ रुपये तक की आय और संपत्ति की घोषणा कर सकते हैं। उन्हें संपत्ति के मूल्य के 30 प्रतिशत के बराबर कर चुकाना होगा। साथ ही अघोषित आय पर 30 प्रतिशत कर और जुर्माने की जगह 30 प्रतिशत अतिरिक्त कर देना होगा। दूसरी श्रेणी में आने वाले व्यक्ति पांच करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर एक लाख रुपये तक का शुल्क देकर मुकदमे और जुर्माने से बच सकते हैं। वित्त मंत्री ने कार्रवाइयों के साथ कर विवादों में दंड और अभियोजन संबंधी नियमों को तर्कसंगत बनाने के लिए आंकलन और जुर्माने की अलग-अलग कार्रवाइयों को एक साझा आदेश के तहत लाने की घोषणा की है। ऐसे मामलों में पहले अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष कार्रवाई की अवधि में जुर्माने की राशि पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लगाया जायेगा, भले ही अपील का निर्णय किसी भी पक्ष में हो।
इसके अलावा, विवादित मामलों में अपील से पहले अग्रिम भुगतान मूल कर मांग के 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। बजट में करदाताओं को आंकलन की कार्रवाई के दौरान भी अपने विवरण को संशोधित करने का मौका दिया जायेगा ताकि विवाद कम हों। इसके लिए उन्हें उन पर लागू कर के ऊपर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त कर देना होगा। आय छुपाने वाले करदाताओं को दंड और जुर्माने से बचने का मौका देने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। इसके लिए, उन्हें कुल कर और उस पर ब्याज राशि के अतिरिक्त शत-प्रतिशत कर राशि शुल्क के रूप में देनी होगी।



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