Budget 2026: केंद्र का बजट बहुत जल्द पेश किया जाएगा। देश की फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) सुबह 11 बजे पार्लियामेंट (Parliament) में बजट पेश करेंगी। मिडिल क्लास को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं। टैक्सपेयर्स को ज़्यादा राहत चाहिए। महंगाई के इस दौर में आम नागरिक टैक्स का बोझ और GST का एक्स्ट्रा बोझ नहीं चाहते। आम नागरिक चाहते हैं कि कई चीज़ें सस्ती हों। घरों की कीमतें उनकी हैसियत से बाहर हो गई हैं। इस बीच, यह बात सामने आई है कि GST त्योहार से असल में ज़्यादा फ़ायदा नहीं हुआ है। इसलिए, आम नागरिकों को उम्मीद है कि फाइनेंस मिनिस्टर इस बजट में सस्तेपन का मैसेज देंगी।
क्या इस पर होगा फोकस?
ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि केंद्र सरकार इस बजट में मेक इन इंडिया पर ज़्यादा ज़ोर देगी। सरकार मेक इन इंडिया चीज़ों के लिए खास छूट दे सकती है। सरकार टैक्स का बोझ कम करके खरीदने की ताकत बढ़ाने पर फोकस कर सकती है। देश के विकास के लिए घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे इन मैन्युफैक्चरर्स को कंज्यूमर-ओरिएंटेड मार्केट में ज़्यादा फायदा होगा।
इसलिए, यह अनुमान है कि भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट, PC मार्केट में सस्ते हो जाएंगे। अगर कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले यूनिट और कंपोनेंट्स जैसी चीज़ों पर कस्टम ड्यूटी कम हो जाती है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते हो जाएंगे। घरेलू प्रोडक्शन बढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में नए प्लेयर्स के आने की संभावना है। कॉम्पिटिशन बढ़ने से कंज्यूमर्स को बहुत फायदा होगा।
सस्ते घरों के लिए सरकार क्या करेगी?
पिछले पांच सालों से रियल एस्टेट सेक्टर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर लगातार चीज़ों की कीमतों में कमी की मांग कर रहे हैं। घरों की बढ़ती कीमतों की वजह से शहरी इलाकों में नागरिक घबराए हुए हैं। यह वर्ग महंगाई और घरों की कीमतों में बढ़ोतरी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग घर चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए, उम्मीद है कि घर खरीदते समय कर्ज लेने वालों और टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलनी चाहिए। ब्याज में कटौती की लिमिट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग है। सब्सिडी फिर से शुरू करने की मांग है। इससे घर खरीदने के लिए अच्छा माहौल बनने की उम्मीद है।
मांग है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्लान का प्रीमियम कम किया जाए। मांग है कि इंश्योरेंस प्लान पर सभी तरह के टैक्स कम किए जाएं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सेक्शन 80D जैसे टैक्स का दायरा बढ़ाने की मांग है। इंश्योरेंस प्रीमियम पर स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की मांग है।



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Sun, Feb 01 , 2026, 10:43 AM