वाराणसी। उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र (Dayashankar Mishra) (Dayalu) ने सोशल मीडिया पर मणिकर्णिका घाट को लेकर उठे विवाद पर स्थिति साफ करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में काशी आज अपने दिव्य एवं भव्य स्वरूप के कारण पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। उन्होने कहा कि वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 7.26 करोड़ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का स्वागत कर वाराणसी ने नया इतिहास रचा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद अब मणिकर्णिका घाट का समग्र एवं गरिमामयी पुनर्विकास काशी की आध्यात्मिक आत्मा को और अधिक सशक्त बना रहा है। मणिकर्णिका घाट पर 17.56 करोड़ रुपये की लागत से रैंप, वुड प्लाजा, व्यूइंग एरिया, बेहतर एक्सेस पाथ, रूफटॉप एवं वीआईपी सीटिंग जैसी आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं श्रद्धालु-हितैषी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
इस परियोजना की नींव वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी, जिसे वर्ष 2026 तक पूर्ण किया जाना है। परियोजना का उद्देश्य मोक्ष के इस पावन द्वार को और अधिक सम्मानजनक, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाना है, वह भी आस्था एवं परंपरा की पवित्रता को अक्षुण्ण रखते हुए।आयुष मंत्री ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास परियोजना को रुपा फाउंडेशन द्वारा अपनी सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) प्रतिबद्धताओं के वित्तपोषित एवं क्रियान्वित किया जा रहा है। यह परियोजना पिछले एक वर्ष से क्रियान्वयन की अवस्था में है। इसके तहत दाह-संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं जैसे चिता प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण व विक्रय क्षेत्र, पूर्व-क्रिया स्थल, मुंडन क्षेत्र, आगंतुकों के बैठने की सुविधा, शौचालय एवं पेयजल व्यवस्था को बेहतर एवं व्यवस्थित किया जा रहा है।
जनसंपर्क अधिकारी गौरव राठी की ओर से जारी विज्ञप्ति में मंत्री ने बताया कि घाट की सीढ़ियों पर आरंभ किए गए पुनर्निर्माण कार्य के दौरान सीढ़ियों से सटी ‘मढ़ी’ की दीवारों पर स्थापित कुछ आकृतियाँ, शिल्पकृतियाँ एवं मूर्तियाँ ध्वस्तीकरण के समय अपनी जगह से हटकर नीचे आ गई थीं। इस प्रक्रिया में प्रभावित हुई सभी मूर्तियों एवं शिल्पकृतियों को पूरी तरह सुरक्षित रूप से एकत्र कर संरक्षण में रखा गया है, ताकि कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें यथाशीघ्र अपने मूल स्वरूप एवं स्थान पर पुनः स्थापित किया जा सके।
स्पष्ट किया गया है कि मणिकर्णिका घाट पर स्थित मसाननाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, तारकेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिर पूर्णतः सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। सोशल मीडिया पर यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि मंदिरों को क्षति पहुँचाई जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल दाह-संस्कार से जुड़ी सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है। जिस मणिकर्णिका घाट को वर्षों तक अव्यवस्था और गंदगी के हवाले छोड़ दिया गया था, वही घाट आज विश्वस्तरीय सुविधाओं एवं आध्यात्मिक गरिमा का प्रतीक बनता जा रहा है। आज काशी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, विरासत एवं विकास के संगम के रूप में वैश्विक पहचान स्थापित कर रही है। जनता यह देख और समझ रही है कि काशी का यह स्वर्णिम युग इसी सशक्त एवं दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है।



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