सीपीआई की शताब्दी यात्रा आजादी के लिए संघर्ष की विरासत है : डी राजा!: सीपीआई की शताब्दी यात्रा आजादी के लिए संघर्ष की विरासत है : डी राजा!

Sun, Jan 18 , 2026, 09:41 PM

Source : Uni India

खम्मम. तेलंगाना में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा (D Raja, speaking) ने रविवार को सीपीआई की 100 साल की यात्रा को 'संघर्षों और बलिदानों का एक स्वर्णिम रास्ता' बताते हुए उसकी जड़ों को आजादी के आंदोलन और लोगों के उद्देश्यों से जोड़ा। राजा ने तेलंगाना के खम्मम शहर में सीपीआई के शताब्दी समारोह के समापन पर बोलते हुए याद दिलाया कि सीपीआई का गठन जब 26 दिसंबर, 1925 को हुआ था, तब उस समय भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था। उन्होंने पार्टी के स्थापना के समय से ही पूर्ण स्वतंत्रता को अपना लक्ष्य घोषित करने की बात कही और देश के स्वतंत्रता स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे रहने का जिक्र किया।

उन्होंने पार्टी के समारोह को एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए शताब्दी कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई देशों के साथियों और विदेशी प्रतिनिधियों का हवाला दिया। उन्होंने समारोह में नेपाल, चीन, वियतनाम, कोरिया और अन्य देशों के विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति को पार्टी की अंतरराष्ट्रीय एकजुटता (International Solidarity) को प्रदर्शित करने वाला बताया। सीपीआई के महासचिव ने सीपीआई और कांग्रेस दोनों की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय भूमिका और उस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, "जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया, उन्हें आज श्रेय लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

उन्होंने सीपीआई की वैचारिक स्थिति के बाबत कहा कि पार्टी न केवल कम्युनिस्टों के रूप में बल्कि अंतर्राष्ट्रीयवादियों के रूप में भी खड़ी है, जो दुनियाभर में अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले लोगों के साथ एकजुटता दिखाती है। श्री राजा ने फिलिस्तीन के नागरिकों की पीड़ा पर चिंता व्यक्त की और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप दो-राज्य समाधान के लिए समर्थन दोहराया। राजा ने केंद्र की नीतियों की आलोचना करते हुए हाल के वर्षों में भारत की वैश्विक स्थिति के कमजोर होने का आरोप लगाया। उन्होंने मोदी सरकार पर संयुक्त राज्य अमेरिका और कॉरपोरेट हितों के दबाव के आगे झुकने पर चिंता जताते हुए साम्राज्यवादी ताकतों का विरोध करने का आह्वान किया।

उन्होंने कम्युनिस्टों के स्वतंत्रता के बाद के भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निर्माण और नियोजित विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया और उनसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का आग्रह किया। सीपीआई के शताब्दी समारोह में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, विभिन्न वामपंथी दलों के नेता और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए।

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