WTO 14th Ministerial Meeting: इलेक्ट्रॉनिक डाउनलोड पर आयात शुल्क, ट्रिप्स में संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय टला

Wed, Apr 01 , 2026, 08:24 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

नयी दिल्ली: विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की कैमरून बैठक इलेक्ट्रॉनिक स्ट्रीमिंग और डाउन लोग पर आयात शुल्क पर रोक और व्यापार में बौद्धिक संपदा अधिकार के समझौते का उल्लंधन न होने पर भी परिस्थिति आधारित शिकायत पर पाबंदी की अवधियों के विस्तार तथा डब्ल्यूटीओ में सुधार जैसे महत्वपूर्ण पर किसी ठोस निर्णय तक पहुंचे बिना समाप्त हो गयी।

इलेक्ट्रानिक प्रेषण पर शुल्क की रोक 1998 से और ट्रिप्स समझौते के तहत परिस्थिति आधारित शिकायत पर रोक की व्यवस्था 1995 से लागू है और इन दोनों मामलों में रोक की अवधि 31 जनवरी 2026 तक थी। कैमरून के याउंडे में 26 से 30 मार्च तक चली डब्ल्यूटीओ के 14वीं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इलेक्ट्रानिक संप्रेषण तथा ट्रिप्स समझौते में उल्लंघन-रहित और स्थिति संबंधी शिकायतों (एनवीएससी) पर रोक की अवधि के विस्तार पर जिनेवा में बातचीत जारी रखने का फैसला हुआ है। 

सदस्य देश डब्यूटीओ में सुधार और अल्पविकसित देशों के लिए पैकेज से संबंधित मुद्दों पर चर्चा जिनेवा में जारी रखेंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि भारत ट्रिप्स समझौते में उल्लंघन-रहित और स्थिति संबंधी शिकायतों (एनवीएससी) पर रोक की अवधि के विस्तार के पक्ष में है। शिकायतों की ये व्यवस्थाएं ऐसी हैं जिनके तहत कोई सदस्य देश दूसरे सदस्य की वैध कार्यवाही से होने वाले बौद्धिक संपदा लाभ के नुकसान की शिकायत कर सकता है, भले ही उस कार्यवाही से ट्रिप्स का कोई नियम न टूटा हो। 

भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देश ऐसी शिकायतों को अस्पष्ट और अपारदर्शी बताते हुए इनका विरोध करते रहे हैं।  उनका कहना है कि ऐसी शिकायतों पर रोक हटने से दवाओं की आपूर्ति बढ़ाने के अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसे जन स्वास्थ्य उपायों पर रोक लग सकती है। इसी लिये वे इसके विस्तार के पक्ष में हैं। इसके विपरीत इलेक्ट्रानिक प्रेषण पर आयात शुल्क पर रोक के समझौता डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में मजबूत देशों के पक्ष में है और इससे विकासशील तथा गरीब देशों का राजस्व प्रभावित होता है। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक प्रेषण पर सीमा शुल्क लगाने पर रोक के विस्तार के मुद्दे पर आम सहमति बनाने के सदस्यों के प्रयासों में रचनात्मक रूप से भाग लिया। 

गहन चर्चाओं के बावजूद, सदस्यों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन पाई। याउंडे में 14वीं मंत्रिस्तरीय के मुख्य एजेंडा में मत्स्य पालन सब्सिडी; विकास के लिए निवेश सुविधा (आईएफडी) समझौते को शामिल करना, कृषि और विकास के मुद्दे शामिल थे जिसमें अल्पविकसित देशों (एलडीसी) के मुद्दे भी शामिल हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। याउंडे में, मंत्रियों ने मत्स्य पालन सब्सिडी पर जारी रखने पर सहमति व्यक्त की ताकि 15वीं मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए सिफारिशें तैयार की जा सकें और मत्स्य पालन सब्सिडी पर सब्सिडी पर व्यापक नियम तैयार किये जा सकें।

वाणिज्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, याउंडे सम्मेलन में छोटे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में बेहतर ढंग से एकीकृत करने और स्वच्छता और पादप-स्वच्छता उपायों (एसपीएस) तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) पर समझौतों के अंतर्गत विशेष और विभेदक व्यवहार प्रावधानों के सटीक, प्रभावी और परिचालन कार्यान्वयन को बढ़ाने के संबंध में दो निर्णयों को स्वीकार्य किया। इन्हें सदस्यों ने पहले जिनेवा में अनुमोदित किया था।

ई-कॉमर्स के मुद्दे पर, भारत ने ठोस कार्य के लिए अपना समर्थन दिया जो डिजिटल विभाजन, डिजिटल अवसंरचना और कौशल, तथा विनियामक ढांचे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विकासशील और अल्प विकसित देशों के पास अपना डिजिटल भविष्य बनाने के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध हों। मुद्दा और ई-कॉमर्स पर कार्य कार्यक्रम अब जिनेवा में होने वाली महापरिषद की अगली बैठक में निर्णय के लिए उठाया जाएगा। 

कृषि के क्षेत्र में, भारत ने वैश्विक आबादी के लिए भूख-मुक्त भविष्य के महत्व पर ज़ोर दिया। भारत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि कृषि वार्ताओं में मौजूदा गतिरोध का मूल कारण 'विश्वास की कमी' है, जिसे केवल पिछली मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में किए गए वादों को पूरा करके ही दूर किया जा सकता है। भारत ने कृषि वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए 'संभावित नए दृष्टिकोणों' पर अपने प्रस्ताव के संबंध में सदस्य देशों से रचनात्मक सहयोग का आह्वान किया। 

इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया कि एक सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि वार्ताओं का मुख्य केंद्र (फोकस) भटकने न पाए और पिछली मंत्रिस्तरीय निर्देशों के अनुसार पीएसएच (अनाज के सरकारी भंडार) तथा एसएसएम ( आयात में उछाल की स्थिति में सुरक्षा के विशेष उपाय) और कपास जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर प्राथमिकता वाले परिणाम प्राप्त करने के लक्ष्य के अनुरूप बना रहे।

विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ने सदस्य देशों से यह भी आग्रह किया है कि वे सार्वजनिक भंडार के लिए अनाज की सरकारी खरीद पर एक स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए 'विकास-उन्मुख दृष्टिकोण' अपनाएं, और ऐसा करके विकासशील देशों की आवश्यकताओं के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करें।

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