LPG, CNG और PNG में क्या अंतर है? 99 परसेंट लोग नहीं जानते 'ये' ज़रूरी बातें

Sun, Mar 15 , 2026, 02:26 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

मुंबई: हर घर रोज़ाना के काम के लिए गैस पर निर्भर रहता है। चाहे सुबह की चाय हो, नहाने का पानी हो या दोनों टाइम का खाना। लेकिन गैस का इस्तेमाल यहीं खत्म नहीं होता। सुबह कॉलेज, ऑफिस या काम पर जाने के लिए हम जिस बस, टैक्सी या ऑटो का इस्तेमाल करते हैं, वह भी गैस से ही चलती है। जब ईरान और इज़राइल के बीच तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हम तुरंत गैस की बढ़ती कीमतों के बारे में बात करने लगते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिसे हम गैस कहते हैं, क्या वह हर जगह एक जैसी होती है?

LPG, CNG और PNG... ये शब्द हम रोज़ सुनते हैं। इन तीनों गैसों की लपटें दिखने में नीली होती हैं, लेकिन इनके साइंस और काम करने के तरीके में बहुत बड़ा अंतर होता है। क्या आप इनके बीच का अंतर जानते हैं? तो, चलिए आज आसान भाषा में इस गैस की दुनिया के राज़ समझते हैं।

1. LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस): होम डिलीवरी
भारत में लाखों घरों की रसोई में मिलने वाला लाल रंग का सिलेंडर LPG है। यह गैस क्रूड ऑयल की रिफाइनिंग के दौरान प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों को मिलाकर बनती है। इसे हाई प्रेशर में लिक्विड फॉर्म में बदला जाता है। इससे एक छोटे सिलेंडर में भी बहुत सारी एनर्जी स्टोर करना और उसे दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना आसान हो जाता है। LPG हवा से भारी होती है, इसलिए अगर यह लीक हो जाए तो ज़मीन पर जमा हो जाती है।

2. PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस): सिलेंडर के झंझट से छुटकारा
बड़े शहरों में अब सिलेंडर की जगह पाइपलाइन ने ले ली है जो हर घर तक पहुंच रही है। इसे ही हम 'PNG' कहते हैं। यह मुख्य रूप से 'मीथेन' गैस है। इसे सिलेंडर में नहीं भरा जाता, बल्कि पाइप के ज़रिए सीधे आपकी ग्रेट तक पहुंचता है। सिलेंडर खत्म होने का डर नहीं रहता और बुकिंग की टेंशन भी नहीं। इसे बिजली के बिल की तरह इस्तेमाल करने के बाद महीने के आखिर में बिल आता है। खास बात यह है कि यह हवा से हल्की होती है, इसलिए अगर यह लीक हो जाए तो हवा में उड़ जाती है, जिससे एक्सीडेंट का खतरा कम हो जाता है।

3. CNG (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस): सस्ती और पर्यावरण के लिए अच्छी
गाड़ियों में फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल होने वाली CNG, एक तरह की नेचुरल गैस है।
खासियत: नेचुरल गैस को बहुत ज़्यादा प्रेशर पर कम्प्रेस किया जाता है। CNG न सिर्फ़ पेट्रोल-डीज़ल से सस्ती है, बल्कि इससे पॉल्यूशन भी कम होता है। इसीलिए इसे 'क्लीन फ्यूल' कहा जाता है।

4. LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस): इंटरनेशनल ट्रेड की रीढ़
जब गैस को एक देश से दूसरे देश में जहाज़ से भेजना होता है, तो LNG का इस्तेमाल किया जाता है।

प्रोसेस: नेचुरल गैस को माइनस 162 डिग्री सेल्सियस (-162°C) तक ठंडा किया जाता है, जिससे यह लिक्विड बन जाती है। लिक्विड स्टेट में इसका वॉल्यूम 600 गुना कम हो जाता है, जिससे बड़े टैंकरों में हज़ारों किलोमीटर का सफ़र करना मुमकिन हो जाता है। हालांकि टेक्नोलॉजी के साथ फ्यूल का नेचर बदलता है, लेकिन सेफ्टी सबसे ज़रूरी है। LPG लीक होने पर ज़्यादा खतरनाक हो सकती है क्योंकि यह ज़मीन पर जमा हो जाती है, जबकि PNG हल्की होने की वजह से तेज़ी से फैलती है। तीनों गैसों की मौजूदगी ही आज भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को बनाए रखती है।

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