मुम्बई। सनातन धर्म (Sanatan Dharma) के 10 हजार वर्ष पुराने दो प्रतीक त्रिशूल और वज्र फिलीपींस (Two Symbols: The Trident and the Vajra - Philippines) में खुदाई (Excavation) में प्राप्त किए गए. भारतीय शोधकर्ता एवं व्यवसायी सैयद शमी़र हुसैन (Syed Shamir Hussain) ने भगवान शिव और भगवान इंद्र से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़ एवं प्राचीन कलाकृतियाँ प्रस्तुत की. इन कलाकृतियों में भगवान शिव से संबंधित त्रिशूल (Trishul) और भगवान इंद्र (Lord Indra) से जुड़ा वज्र (वज्रायुध) शामिल है, जो फिलीपींस में खनन के दौरान प्राप्त हुए थे. इस प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सैयद शमीर हुसैन ने इन कलाकृतियों की खोज, उनके ऐतिहासिक संदर्भ और उनकी प्रामाणिकता से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत किए।
इस प्रेस कांफ्रेंस में डॉ वी. जयराज (वैज्ञानिक एवं कला इतिहासकार), श्री दीपेश मेहता (वकील एवं सॉलिसिटर (यू.के.) श्री नितेश मनोपारा (व्यवसायी) और ममता राजेश उताले (उद्यमी) भी उपस्थित थीं.
विख्यात रिसर्च स्कॉलर और व्यवसायी सैयद शमीर हुसैन ने मुंबई में 10 हजार साल प्राचीन त्रिशूल और 3 हजार वर्ष प्राचीन वज्र का अनावरण किया। ये दुर्लभ कलाकृतियाँ फिलीपींस में खनन के दौरान मिली थीं।
इन कलाकृतियों को भारतीय पुरातत्व विभाग, संस्कृति मंत्रालय और भारतीय संग्रहालय द्वारा बहुमूल्य ऐतिहासिक वस्तुओं के रूप में मान्यता दी गई है। इस मीडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान, शोध विद्वान और व्यवसायी सैयद शमीर हुसैन ने इस खोज से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत किया और इन कलाकृतियों की प्रस्तावित नीलामी पर भी चर्चा की।
मुम्बई के ताज लैंड एंड होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैयद शमीर हुसैन ने बताया कि 2015 में फिलीपींस में खनन के दौरान त्रिशूल और वज्र मिले थे। 2012 से फिलीपींस में वह स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। 2015 मे खुदाई में कुछ चीजें जब असामान्य महसूस हुई तो उन्हें खनन की जगह पर बुलाया गया। खोज के समय फिलीपींस में त्रिशूल और वज्र जैसी पुरावशेषों को देखकर वह बहुत हैरान हुए। बाद में उन्होंने इन पुरावशेषों को भगवान शिव के त्रिशूल और इंद्र के वज्र के रूप में पहचाना। वह 2016 में इन पुरावशेषों को भारत लाए.
उन्होंने कहा कि खुदाई के दौरान जब ये त्रिशूल और वज्र मिला कुछ दिनों बाद उन्हें साँप ने काटा मगर वह चमत्कारिक रूप से बच गए. मैं सभी दस्तावेज लेकर आया हूं. एएसआई को भी इसकी महत्ता पता है. ये चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस है. जब त्रिशूल मिला तो मुझे लगा कि मैं वर्ल्ड फेमस हो जाऊँगा. त्रिशूल और वज्र के सम्बन्धित मैंने हर मंत्री को और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी (Prime Minister Narendra Modi) को भी पत्र भेजा है.
रमज़ान के महीने में जब ईरान इस्राइल युद्ध चल रहा है मैं ने इसका अनावरण किया. फिलिपीन मे बहुत सारे हिन्दू हैं बहुत कम मुस्लिम हैं वहाँ मुझे ये मिलना भारतीय एकता का प्रतीक है. मुझे इसके दर्शन करने के लिए 200 कॉल्स रोज आते हैं. त्रिशूल और वज्र आने के बाद मेरी जिन्दगी बेहतर हुई है. ब्रह्मास्त्र फिल्म मे जैसा दिखाया है वैसी मेरी फिलिंग आ रही थी. 10 जून को हम इसका ऑक्शन करेंगे. इन दोनों दुर्लभ वस्तुओं की नीलामी के लिए त्रिशूल की शुरुआती क़ीमत 500 करोड़ रूपए और वज्र के लिए 250 करोड़ रुपये की शुरुआती क़ीमत रखी गई है. अपनी जिंदगी के 10 साल मैंने इनके रिसर्च मे लगा दिया है और ये दुर्लभ वस्तुएं है. नीलामी से जो रकम आएगी मैं उन्हें चैरिटी करूंगा. अनाथाश्रम मे हेल्प करना चाहता हूं. बेसहारा बच्चों को गोद लेकर उन्हें शिक्षित करने की इच्छा है. दुनिया में 880 करोड़ की आबादी है और इतनी बड़ी संख्या में मुझे ये एंटीक कलाकृतियां मिली हैं."
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