नयी दिल्ली। खनन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी वेदांता (Vedanta) के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने मंगलवार को कहा कि भारत के पास प्रचुर प्राकृतिक (natural resources) संसाधन है, लेकिन उसका दोहन कर आयात पर निर्भरता कम करने के लिए व्यवसायों पर अधिक भरोसा करने की जरूरत है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के देश पर पड़ रहे प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा और खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का उपयोग करना होगा और उद्यमियों को बड़े स्तर पर काम करने की स्वतंत्रता देनी होगी। उन्होंने विकास के लिए नीतिगत सुधार और नियामकीय सोच में बदलाव पर बल दिया और सरल नियमों, व्यवसायों पर अधिक भरोसे तथा लंबी अनुमोदन प्रक्रियाओं और मुकदमेबाजी की बजाय स्वप्रमाणन और ऑडिट आधारित व्यवस्था अपनाने की वकालत की। उन्होंने कहा, "प्रणाली को व्यवसायों के लिए बाधाएं पैदा करना बंद करना चाहिये। उद्यमियों को पहचान और सम्मान मिलना चाहिये, और संदेह का लाभ भी उन्हें ही दिया जाना चाहिये।"
श्री अग्रवाल ने इसे दुखद बताया कि भारत उन युद्धों के प्रतिकूल प्रभाव झेल रहा है जिनसे उसका कोई संबंध नहीं है। वेदांता की उपलब्धियों और लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी ने जिंक का उत्पादन दस गुना और एल्युमिनियम का उत्पादन बीस गुना बढ़ाया है। पिछले 10 वर्षों में वेदांता ने राष्ट्रीय राजकोष में 4.5 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। तेल एवं गैस क्षेत्र में कंपनी का लक्ष्य प्रतिदिन 10 लाख बैरल उत्पादन का है। लौह अयस्क में कंपनी का लक्ष्य 10 करोड़ टन उत्पादन का है जो देश के मौजूदा उत्पादन का लगभग एक-तिहाई होगा।



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