Lord Vishnu avatar: भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं, जो एक क्रोधी, शक्तिशाली, और चिरंजीवी (अमर) ऋषि-योद्धा के रूप में जाने जाते हैं। वे ब्राह्मण ऋषि जमदग्नि और क्षत्रिय माता रेणुका के पुत्र थे, इसलिए उन्हें 'ब्रह्म-क्षत्रिय' कहा जाता है। शिवजी से प्राप्त दिव्य फरसे (कुल्हाड़ी) के कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। उन्होंने अत्याचारी राजाओं से पृथ्वी को 21 बार मुक्त किया था।
परशुराम के बारे में मुख्य जानकारी:
परिचय: भगवान विष्णु के दशावतारों में छठे अवतार, द्वापर युग के अंत में, भृगु वंश में जन्म।
जन्म: अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) को भगवान परशुराम जयंती मनाई जाती है।
माता-पिता: ऋषि जमदग्नि (पिता) और देवी रेणुका (माता)।
गुरु: भगवान शिव, जिनसे उन्हें परशु (कुल्हाड़ी) और युद्ध कला का ज्ञान मिला।
नाम: मूल नाम रामभद्र, लेकिन परशु धारण करने के कारण परशुराम कहलाए।
कार्य: दुष्ट क्षत्रियों (राजाओं) का अंत कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करना।
शिष्य: भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण।
चिरंजीवी: सात अमर व्यक्तियों में से एक, जो आज भी महेंद्रगिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंग:
माता का वध: पिता जमदग्नि की आज्ञा पर उन्होंने अपनी माँ रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया था, लेकिन बाद में वरदान मांगकर उन्हें पुनर्जीवित भी करवा लिया।
क्षत्रिय-विहीन पृथ्वी: कार्तवीर्य अर्जुन द्वारा कामधेनु गाय चुराने और पिता की हत्या करने के बाद, उन्होंने 21 बार पृथ्वी को अत्याचारी क्षत्रियों से मुक्त किया।
पाश्चात्य तट का निर्माण: पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने अपने फरसे को समुद्र में फेंककर, जहां फरसा गिरा, वहां से केरल के तटीय क्षेत्र का निर्माण किया।
भगवान परशुराम को ज्ञान और शस्त्र का अनूठा संगम माना जाता है। मान्यता है कि वे कलयुग के अंत में होने वाले भगवान विष्णु के अंतिम अवतार 'कल्कि' के गुरु के रूप में भी प्रकट होंगे।



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