Eating Time  : खाने का सही समय क्या है? जानें यह आपकी सेहत को कैसे फ़ायदा पहुँचाता है!

Mon, Feb 23 , 2026, 10:20 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Health Tips: आम धारणा है कि हमें भूख लगने पर खाना खाना चाहिए, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि यह गलत है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (National Institute of Ayurveda) के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है। इसे फिट रखने के लिए हमें दवाओं या सख्त डाइट के बजाय सूरज की लय का सम्मान करना चाहिए। असल में, शरीर सूरज की घड़ी के हिसाब से काम करता है। सदियों से आयुर्वेद ने सिखाया है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए। जब ​​हम धूप में खाते हैं, तो पाचन तंत्र मज़बूत होता है और शरीर अंदर से ठीक होने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, लेकिन शरीर सूरज के हिसाब से चलता है। जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर ज़ोर पड़ता है और कई बीमारियाँ होने लगती हैं।

आयुर्वेद का मूल मंत्र है – जब सूरज चमक रहा हो तब खाओ; जब सूरज ढल रहा हो तब आराम करो। इस आसान नियम को मानकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के भी सेहतमंद रह सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय होते हैं और हर समय खाना अलग होना चाहिए। सुबह की शुरुआत हल्के और सिंपल खाने से करें। सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलने लगती है, इसलिए भारी या तला हुआ खाना न खाएं। इसकी जगह हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसी चीजें खाएं। ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और आपको पूरे दिन फ्रेश रखते हैं।

इसके बाद दोपहर का समय सबसे ज़रूरी होता है। जब सूरज अपने पीक पर होता है, तो पाचन की आग (gastrointestinal fire) सबसे ज़्यादा जलती है। आयुर्वेद कहता है कि लंच सबसे ज़्यादा पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए। इस समय आप दाल-चावल, पोली-भाजी, सांभर-चावल, घी-खिचड़ी खा सकते हैं। भारी और पौष्टिक खाना दोपहर में ही पचता है, क्योंकि आग तेज़ होती है। वहीं, शाम को सूरज ढलते ही शरीर की रफ़्तार धीमी हो जाती है। पाचन की आग कमज़ोर हो गई है, इसलिए रात का खाना हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए। सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-भाजी अच्छे ऑप्शन हैं। भारी, तला हुआ, मसालेदार या ज़्यादा मीठा खाना खाने से रात में अपच, भारीपन, नींद न आना या वज़न बढ़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आयुर्वेद भी कहता है कि ‘जब भूख लगे तब खाएं’ वाली आम सलाह गलत है। भूख लगने का समय सूरज से जुड़ा है। सुबह हल्की भूख लगनी चाहिए, दोपहर में तेज़ भूख लगनी चाहिए और शाम को बहुत कम भूख लगनी चाहिए। अगर आपको शाम को भूख लगती है, तो इसका मतलब है कि दिन भर में आपके खाने की आदतें गड़बड़ हैं। सर्कैडियन रिदम डाइट का मतलब है अपने शरीर की नैचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक के हिसाब से खाना। आपके शरीर में 24 घंटे का बायोलॉजिकल साइकिल होता है, जो नींद, डाइजेशन, हॉर्मोन और एनर्जी लेवल को रेगुलेट करता है। सही समय पर और सही मात्रा में खाना इस डाइट का मुख्य सिद्धांत है।

सुबह उठने के 1 घंटे के अंदर नाश्ता कर लेना चाहिए। सुबह मेटाबॉलिज्म ज़्यादा एक्टिव होता है, इसलिए मूंग दाल, चीला, अंडे, दूध, ड्राई फ्रूट्स या पोहा जैसा पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करें। लंच दिन का सबसे भारी खाना होना चाहिए, क्योंकि दोपहर में डाइजेशन बेहतर होता है। इसमें सब्ज़ी, दाल, चावल/पोली, सलाद शामिल होना चाहिए। शाम को हल्का और आसानी से पचने वाला आहार लें। रात का खाना सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले कर लेना चाहिए और यह हल्का होना चाहिए जैसे सूप, खिचड़ी या सब्ज़ी। इस डाइट में रात में देर से खाने से बचना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि उस समय पाचन धीमा हो जाता है और वज़न बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। रोज़ाना एक तय समय पर खाने की आदत डालें। सुबह कुछ देर धूप में बिताना और रात को सोने से पहले मोबाइल/स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी सर्कडियन रिदम को संतुलित करने में मदद करता है। पर्याप्त नींद (7–8 घंटे), रेगुलर एक्सरसाइज़ और संतुलित आहार से हॉर्मोन संतुलित रहते हैं, वज़न नियंत्रित रहता है और पाचन बेहतर होता है। सर्कडियन रिदम डाइट का मुख्य लक्ष्य शरीर की प्राकृतिक लय के अनुरूप रहना है।

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