Shiva Jyotirlinga: क्या आप जानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ झारखंड कैसे आए? जानिए यह दिव्य कहानी!

Mon, Feb 23 , 2026, 09:35 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Shiva Jyotirlinga: झारखंड के देवघर में बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (जिसे अक्सर वैद्यनाथ लिखा जाता है) को भगवान शिव के 12 पवित्र स्थानों में से 5वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है, जिसे अक्सर बाबा बैद्यनाथ धाम या बैजनाथ धाम कहा जाता है।

1. जगह और महत्व

जगह: देवघर, भारत के झारखंड के संथाल परगना डिवीजन में।

महत्व: यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो एक "प्रकाश स्तंभ" को दिखाता है जहाँ शिव प्रकट हुए थे। यह एक शक्ति पीठ भी है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सती का हृदय यहाँ गिरा था, जिससे यह एक अनोखी जगह बन गई जहाँ शिव और शक्ति (पार्वती) के मंदिर मिले हुए हैं।

"बैद्यनाथ" नाम: इसका मतलब है "डॉक्टरों का भगवान," क्योंकि यहाँ शिव की पूजा सबसे अच्छे डॉक्टर के रूप में की जाती है।

2. रावण की कहानी
शिव पुराण के अनुसार, इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना राक्षस राजा रावण से जुड़ी है:

तपस्या: रावण ने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे उसे लंका ले आएं, ताकि लंका को कोई हरा न सके।

शर्त: शिव ने रावण को एक आत्मलिंग (शिव का एक रूप) दिया, इस सख्त शर्त के साथ कि अगर लंका पहुंचने से पहले लिंग ज़मीन को छू गया, तो वह हमेशा के लिए उसी जगह पर स्थिर रहेगा।

धोखा: लंका में शिव के नतीजों से डरकर देवताओं ने भगवान विष्णु से दखल देने के लिए कहा। विष्णु ने एक ब्राह्मण का रूप लिया और जब रावण आराम कर रहा था, तो उन्होंने लिंग ले लिया। उन्होंने उसे उस जगह पर ज़मीन पर रख दिया जो अब देवघर है।

हमेशा के लिए स्थिर: रावण ने अपनी पूरी ताकत से लिंग को उठाने की कोशिश की, लेकिन वह स्थिर रहा, जिससे उसे यह मानना ​​पड़ा कि यह जगह शिव की पूजा के लिए है।

3. खास बातें
शिव और शक्ति का कनेक्शन
: मुख्य बाबा बैद्यनाथ मंदिर, माँ पार्वती मंदिर से बड़े लाल पवित्र धागों से जुड़ा है, जो शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक है।

पंचशूल (पांच चाकू वाला त्रिशूल): दूसरे ज्योतिर्लिंगों के स्टैंडर्ड त्रिशूल के उलट, मंदिर के शिखर पर एक पंचशूल है, जो सुरक्षा और पाँच पापों - काम, क्रोध, लालच, मोह और ईर्ष्या - के नाश का प्रतीक है।

टूटा हुआ लिंगम: आत्मलिंगम का ऊपरी हिस्सा थोड़ा टूटा हुआ है, माना जाता है कि यह रावण के इसे खींचने की कोशिश का नतीजा है।
सीधी पहुँच: भक्तों को गर्भगृह में जाने और अपने हाथों से जलाभिषेक (जल चढ़ाना) करने की इजाज़त है, जबकि कई दूसरे मंदिरों में ऐसा नहीं होता।

4. श्रावणी मेला
हिंदू महीने श्रावण (मानसून का मौसम) के दौरान, लाखों भक्त, जिन्हें कांवड़िए कहते हैं, मंदिर में चढ़ाने के लिए गंगा से पवित्र जल लेकर सुल्तानगंज (बिहार) से देवघर तक 108 किलोमीटर का सफर करते हैं।

5. मंदिर कॉम्प्लेक्स
बैद्यनाथ मंदिर कॉम्प्लेक्स में कुल 22 मंदिर हैं। मुख्य मंदिर में तीन सोने के बर्तनों वाला एक पिरामिड जैसा टावर है।

6. अलग-अलग विचार (विवाद)
हालांकि देवघर मंदिर सबसे मशहूर है, लेकिन कुछ परंपराएं महाराष्ट्र के परली में वैजनाथ मंदिर को असली 5वां ज्योतिर्लिंग मानती हैं। हालांकि, झारखंड में देवघर मंदिर को रावण की कहानी के संदर्भ में ज़्यादा माना जाता है।

7. कैसे पहुंचें?
सबसे पास का रेलवे स्टेशन
: जसीडीह जंक्शन, जो लगभग 7-8 km दूर है।
सबसे पास का एयरपोर्ट: देवघर एयरपोर्ट (DGH), जो झारखंड में है।

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