नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने गुरुग्राम के सेक्टर-83 में स्थित अंसल हब-83 नाम की वाणिज्यिक परियोजना से जुड़े रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामले में 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। ईडी (ED) के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि यह परियोजना 19 कनाल 15 मरला (लगभग 2.47 एकड़) भूमि क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें 147 दुकानें, 137 कार्यालय स्थान और दो भोजनालय इकाइयां शामिल हैं।
ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि ईडी ने जून 2023 में हरियाणा पुलिस की अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रवर्तकों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की थी। इनमें अंसल हाउसिंग लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक कुशाग्र अंसल और इसकी सहयोगी संस्थाएं 'सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड' शामिल हैं।
हब-83 आवंटी कल्याण संघ की शिकायत के आधार पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो एक हजार से अधिक उन निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने कथित झूठे आश्वासनों और भ्रामक जानकारी के आधार पर इस परियोजना में अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश किया था।
ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ कि वैध वैधानिक अनुमतियां प्राप्त करने से पहले ही परियोजना शुरू कर दी गई थी और वाणिज्यिक इकाइयां निवेशकों को बेच दी गई थीं। हालांकि परियोजना का लाइसेंस दिसंबर 2015 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन आरोप है कि डेवलपर्स ने लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना ही सितंबर 2023 तक निवेशकों से पैसा लेना और इकाइयां बेचना जारी रखा। आगे यह भी पता चला कि कई पीड़ित निवेशकों ने कब्जे में देरी, परियोजना का अधूरा होना, धन की अवैध वसूली और डेवलपर के वैधानिक दायित्वों के उल्लंघन के संबंध में 'हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण' (हरेरा) में शिकायतें दर्ज कराई थीं।
निवेशकों से समय पर कब्जा देने और विश्वस्तरीय सुविधाओं का वादा किया गया था; हालांकि, करीब 15 साल के बाद भी कोई ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है और न ही कब्जा सौंपा गया है।
ईडी ने बताया कि एकत्र किए गए धन का उपयोग परियोजना को पूरा करने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि इसे अन्य उद्देश्यों और व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया गया। अब तक की जांच से पता चला है कि 2011 और 2023 के बीच आवंटियों से 82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई थी।
परियोजना की भूमि और अब तक किए गए निर्माण को अस्थाई रूप से कुर्क किया गया है ताकि संपत्तियों के किसी भी हस्तांतरण, बिक्री या निपटान को रोका जा सके।
मामले में आगे की जांच जारी है। ईडी ने कहा कि वह आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ठगे गए निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।



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Thu, Feb 19 , 2026, 08:46 PM