नयी दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Development Organisation) ने बुधवार को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला में 'ड्रैग पैराशूट' का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक संपन्न किया। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ड्रैग पैराशूट, या 'ड्रोग पैराशूट', चालक दल मॉड्यूल को नीचे उतरते समय स्थिर करने और उसकी गति को कम करने के लिए डिज़ाइन किये गये हैं। ये पैराशूट समुद्र में लैंडिंग से पहले अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। इन्हें गगनयात्रियों को ले जाने वाले भारी और तेज गति से चलने वाले अंतरिक्ष कैप्सूल की रफ्तार धीमी करने के लिए तैनात किया जाएगा।
इन परीक्षणों के दौरान लोड की स्थितियों की जांच डीआरडीओ की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज डायनेमिक टेस्टिंग सुविधा का उपयोग करके की गयी। इस ट्रायल
में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, एरियल डिलीवर रिसर्च एडं डेवलपमेंट प्रतिष्ठान (ADRDE) और टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लैबोरेट्री (TBRL) के वैज्ञानिकों की टीमों ने हिस्सा लिया।
रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परीक्षण उच्च क्षमता वाले रिबन पैराशूट के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता को सिद्ध करता है।
उल्लेखनीय है कि आगरा स्थित एडीआरडीई, डीआरडीओ की एक प्रमुख प्रयोगशाला है, और यह सैन्य एवं अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए पैराशूट और हेवी ड्रॉप सिस्टम विकसित करने में विशेषज्ञता रखती है।



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Thu, Feb 19 , 2026, 08:15 PM