चंद देशों या धनाढ्यों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता एआई का भविष्य: गुटेरेस

Thu, Feb 19 , 2026, 04:13 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (United Nations Secretary-General Antonio Guterres) ने गुरुवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सबका अधिकार होना चाहिए और इसका भविष्य कुछ गिनती के देशों या धनाढ्यों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। गुटेरेस ने यहां भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में इंडिया एआई समिट 2026 (India AI Summit 2026) के चौथे दिन विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों, प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों और अन्य अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण में एआई शिखर सम्मेलन का पहली बार आयोजन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा, "एआई का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता, और न ही इसे कुछ अरबपतियों की इच्छाओं पर छोड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि "एआई का लाभ सभी को मिलना चाहिये" और यदि इसे सही ढंग से किया जाये तो यह सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है, अन्यथा यह असमानता को और बढ़ा सकता है। एक तरफ यह चिकित्सा में महत्वपूर्ण प्रगति को तेज कर सकता है, शिक्षा के अवसरों का विस्तार कर सकता है, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकता है, जलवायु कार्रवाई और आपदा तैयारी को मजबूत कर सकता है और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार कर सकता है। उन्होंने कहा, "लेकिन यह असमानता को गहरा भी कर सकता है, पक्षपात को बढ़ा सकता है और नुकसान को बढ़ावा दे सकता है।"

 गुटेरेस ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का संदेश सरल है: वास्तविक प्रभाव का अर्थ है ऐसी तकनीक जो जीवन को बेहतर बनाये और पृथ्वी की रक्षा करे। उन्होंने एक ऐसे एआई के निर्माण की अपील की जिसमें गरिमा मूलभूत मानक हो। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बताया कि पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो निर्णायक कदम उठाये थे - एआई पर एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की स्थापना और एआई शासन पर एक वैश्विक डायलॉग की शुरुआत। उन्होंने बताया कि इस पैनल की नियुक्ति हो चुकी है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों और विषयों से आये 40 प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हैं। दूसरी तरफ, डायलॉग का पहला सत्र जुलाई में जिनेवा में आयोजित होगा जिसमें प्रत्येक देश और हितधारक अपनी बात रख सकेंगे।

 गुटेरेस ने कहा कि निवेश के बिना कई देश एआई युग से बाहर रह जायेंगे। उन्होंने एआई पर एक वैश्विक कोष की स्थापना का आह्वान किया ताकि विकासशील देशों में बुनियादी क्षमता का निर्माण किया जा सके, वहां कौशल, डाटा, किफायती कंप्यूटिंग शक्ति और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। इस कोष में तीन अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो एक अकेली प्रौद्योगिकी कंपनी के वार्षिक राजस्व के एक प्रतिशत से भी कम है।

उन्होंने कहा कि एआई के प्रसार के लिए यह एक छोटी सी कीमत है, जिसका लाभ सभी को मिलेगा। एआई की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग के बीच श्री गुटेरेस ने डेटा केंद्रों और आपूर्ति शृंखलाओं को हरित ऊर्जा की ओर ले जाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि इसकी लागत कमजोर समुदायों को न चुकानी पड़े, एआई मानव क्षमता को बढ़ाये न कि उसका स्थान ले और एआई सभी के लिए सुरक्षित हो। उन्होंने एआई के नुकसान के प्रति सचेत करते हुए कहा, "हमें लोगों को शोषण, हेरफेर और दुरुपयोग से बचाना होगा। कोई भी बच्चा अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं होना चाहिये।"

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