PM Modi to Visit Somnath : सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: विध्वंस नहीं, 1000 साल की यात्रा का उत्सव

Sun, Jan 11 , 2026, 02:25 PM

Source : Uni India

सोमनाथ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है और इसका सहभागी बनना उनके जीवन का अविस्मरणीय और अमूल्य क्षण है।
वह यहां आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Festival) ' के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। श्री मोदी ने कहा कि आज सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विध्वंस नहीं बल्कि 1000 साल की यात्रा का पर्व है। सोमनाथ को नष्ट करने के एक नहीं अनेकों प्रयास हुए। उसी तरह विदेश आक्रांताओं द्वारा कई सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिशें होती रहीं लेकिन न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत नष्ट हुआ। क्योंकि भारत और भारत की आस्था के केंद्र एक दूसरे में समाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर को मिटाने की कई कोशिशें हुईं। देश के आजाद होने के बाद भी सोमनाथ पर आक्रामण को आर्थिक लूट बताया गया, ऐसा होता तो फिर पहले हमले के बाद इस नष्ट करने की कोशिश नहीं होती। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा सरदार पटेल ने जब पुर्निर्माण का संकल्प लिया तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने यहां आने के लिए योजना बनाई तो उन्हें भी रोका गया।
श्री मोदी ने कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर, हमारे पुरखों ने जान की बाज़ी लगा दी थी। उन्होंने अपनी आस्था, विश्वास, महादेव के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि हजार साल पहले के आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी, सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है। मजहबी आततायी इतिहास के पन्नों में सिमट गए तो वहीं सोमनाथ मंदिर आज भी स्वाभिमान से खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने इतिहास की कुछ घटनाओं का ब्यौरा देते हुए कि हमलावर गजनी को लगा था कि उसने सोमनाथ मंदिर के वजूद को मिटा दिया, लेकिन 12 शाताब्दी में पुनर्निर्माण हुआ। फिर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रामण किया। इसके बाद 14वीं सदी में जूनागढ़ के राजा ने पुनर्निर्माण किया। फिर सुल्तान अहमद शाह ने दुस्साहस किया। उसके बाद सुल्तान महमूद वेगड़ा ने मंदिर को मस्जिद बनाने की कोशिश की। 17वीं और 18वीं शताब्दी में औरंगजेब का दौरा आया। उसने मंदिर को अपवित्र करने की कोशिश तो अहित्याबाई होलकर ने मंदिर बना दिया।
श्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास का विजय और पुनर्निर्माण का है।

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