नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के चल रहे चुनावों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की एक उप-समिति के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी, आदेशों की बैक-डेटिंग और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों के परिप्रेक्ष्य में रोक लगा दी। जेकेसीए के चुनाव अदालत की ओर से नियुक्त चुनावी अधिकारी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ए.के. ज्योति की देखरेख में हो रहे हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अगर ये आरोप सच हैं, तो यह एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के नियमों का उल्लंघन है।
पीठ ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि यदि कोई चुनावी नतीजे आए हैं, तो उन्हें अगले आदेश तक घोषित नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने जोर दिया कि खेल निकायों, खासकर जो न्यायिक निगरानी में काम करते हैं, उनसे पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करने की उम्मीद की जाती है। पीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने की कोई भी कोशिश कड़ी जांच के दायरे में आएगी।
संबंधित मामले में पेश याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि उप-समिति ने मिलीभगत करके पिछली तारीखों में आदेश जारी किए और गैर-कानूनी तरीके से चुनावी रोल में बदलाव किया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता कमजोर हुई। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा के नेतृत्व वाली कानूनी टीम ने किया, जिसमें एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सोएब कुरैशी, एडवोकेट शेख फराज, एडवोकेट चेतना अलग और एडवोकेट अमन कयूम वानी शामिल थे।



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