ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में एसआईआर पर 'गंभीर चिंताएं' जतायी

Mon, Jan 05 , 2026, 12:24 PM

Source : Uni India

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) ने राज्य में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) को कड़ा पत्र लिखा है। सुश्री बनर्जी ने एसआईआर (SIR) को 'एक गंभीर और महत्वपूर्ण चिंता'बताते हुए पत्र में लिखा कि जिस अनुचित जल्दबाजी में बिना पर्याप्त तैयारी या ग्राउंडवर्क के यह काम किया जा रहा है, वह मौलिक रूप से गलत है तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और उसके राज्य-स्तरीय अधिकारियों की ओर से पूरी तरह से स्पष्टता और योजना की कमी है।

 उन्होंने अपने पत्र में एसआईआर के तर्क और उसके कार्यान्वयन दोनों पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया ने मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच व्यापक भ्रम पैदा किया है। उन्होंने "तार्किक विसंगतियों" के तहत चिह्नित बड़ी संख्या में प्रविष्टियों पर यह तर्क देते हुए चिंता जतायी कि ऐसे वर्गीकरण बिना पर्याप्त पारदर्शिता या मतदाताओं को स्पष्ट संचार के किए गए थे। उन्होंने कहा, "तथाकथित तार्किक विसंगतियों जैसे वर्तनी की त्रुटियों, उम्र से संबंधित भिन्नताओं आदि को दूर करने के नाम पर ईसीआई ने ऐसे सभी मतदाताओं के दस्तावेजों के सत्यापन का निर्देश दिया है। 

ऐसे मामलों में जहां ये प्रमाण पत्र अन्य जिलों या राज्यों के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं, सत्यापन संबंधित जारी करने वाले अधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक है। ऐसा लगता है कि इस दृष्टिकोण का उद्देश्य इस प्रक्रिया में देरी करना है, क्योंकि ऐसे अंतर-जिला या अंतर-राज्य सत्यापन कई मामलों में निर्धारित समय के भीतर पूरा करना संभव नहीं होगा। इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मताधिकार से वंचित होने की संभावना है।"

ईसीआई के निर्देशों की स्पष्टता पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "चौंकाने वाली बात यह है कि महत्वपूर्ण निर्देश लगभग दैनिक आधार पर अक्सर व्हाट्सएप संदेशों और टेक्स्ट संदेशों जैसे अनौपचारिक माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं। ऐसी अनौपचारिकता और मनमानी सटीकता, पारदर्शिता या जवाबदेही के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ती है। इस प्रक्रिया में कोई भी त्रुटि, अस्पष्टता या अनिश्चितता गंभीर विसंगतियों को जन्म दे सकती है, जिसमें वास्तविक मतदाताओं के संभावित मताधिकार से वंचित होना शामिल है।

चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, "आईटी सिस्टम के गलत इस्तेमाल से और ईआरओ की जानकारी या मंज़ूरी के बिना मतदाताओं के नाम हटाने के गंभीर आरोप भी हैं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सक्षम वैधानिक अधिकारी हैं। इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि ऐसे कामों को किसने मंज़ूरी दी और किसके सुपरविज़न या निर्देश पर ये किए गए हैं तथा इसके सुपरविज़न या निर्देश के तहत किए गए किसी भी गैर-कानूनी काम के लिए किसे पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"

मुख्यमंत्री ने इस काम की 'असामान्य जल्दबाजी'पर भी चिंता जताई और कहा कि यह संशोधन 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय के करीब किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता सूची संशोधन में किसी भी मनमानी से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हो सकता है और आयोग से आग्रह किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रक्रियात्मक कमियों के कारण किसी भी योग्य मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।

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