Drug trade in Bihar: बापू की कर्मस्थली चंपारण में नशे का गोरखधंधा बदस्तूर जारी! पुलिस डाल-डाल, पियक्कड़ पातपात, सरकार कंगाल और धंधेबाज मालामाल

Mon, Dec 29 , 2025, 03:34 PM

Source : Uni India

मोतिहारी: बिहार में शराबबंदी (Liquor Ban in Bihar) है, लेकिन प्रदेश के पूर्वी चंपारण जिले में पाबंदी के बावजूद मदिरा की खपत बढ़ गयी है और हालत कह रहे है कि पुलिस डाल डाल घुमती रहती है, पियक्कड़ पात पात पीते रहते है, सरकार को भले राजस्व का चूना (losing revenue) लगता है, लेकिन धंधेबाजों की तो लॉटरी निकल आई है। विगत 12 महीने से भी कम समय में जिला से 42,59,607 लीटर देशी, विदेशी शराब, कच्ची शराब (illicit liquor) और स्प्रिट बरामद की गई है, जो गोपनीय मदिरा व्यापार की दास्तां बयान करती है।

बापू की कर्मस्थली चंपारण में नशे का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है। अवैध शराब की बरामदगी होती है, धंधेबाज और पीनेवाले गिरफ़्तार होते है, लेकिन यह कारोबार "पुलिस डाल-डाल, तो पियक्कड़ और धंधेबाज पात-पात" वाले अंदाज में चलता रहता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2025 से 25 दिसम्बर 2025 तक पूर्वी चंपारण की पुलिस ने 2,02, 872 लीटर देशी, 58,524 लीटर विदेशी शराब और 5,544 लीटर स्प्रिट बरामद की है। 

बरामद शराब और स्प्रिट की कीमत 13.66 करोड़ आंकी गयी है। इसके अतिरिक्त मद्यनिषेद विभाग की पूर्वी चंपारण इकाई ने जिला के विभिन्न क्षेत्रों से 75,116 लीटर देशी, 9,086 लीटर विदेशी एवं 39,08,465 लीटर जावा/महुआ की कच्ची शराब बरामद की है, जिसकी कीमत भी करोड़ों में है। वर्ष 2025 में बिहार के पूर्वी चंपारण जिला में 42,59,607 लीटर देशी, विदेशी शराब, कच्ची शराब और स्प्रिट बरामद की गई है। बिहार में प्रतिबंध के बाद यह बरामदगी बयान करती है कि नशे के इस विकल्प का व्यवसाय बदस्तूर जारी है।

 इस सबंध में यदि एक नजर शराब बंदी से पहले की स्थिति पर डालें तो पूर्वी चंपारण जिले में आधिकारिक तौर पर प्रतिमाह देशी शराब की मात्रा 8,97,000 लीटर, विदेशी शराब 1,57,540 और बियर 2, 98,908 लीटर निर्गत होती थी, जिसकी कुल मात्रा 13,53,448 लीटर थी। अब शराबबंदी के बाद के एक वर्ष में बरामद 42,59,607 लीटर अवैध मादक पेय पर नजर डालें तो यह मात्रा शराबबंदी से पहले प्रतिमाह निर्गत होने वाली मात्रा के मुकाबले 3.14 गुणा से भी अधिक है। सरकारी प्रतिबंध के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी के आंकड़ें विस्मयकारी हैं। प्रदेश और जिला के बॉर्डर पर तमाम सतर्कता के बावजूद आखिर शराब पूर्वी चंपारण तक पहुंच कैसे जाती है! वह कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिसमें प्रतिबंध के बावजूद शराब का अवैध धंधा फल-फूल रहा है!

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2023 में अवैध शराब ने पूर्वी चंपारण में दर्जनों लोगों की जान ले ली थी। मौत को इतनी करीब से देखने के बाद भी लोगों में आशक्ति घटने के बजाय बढ़ती रही और ज़हर का कारोबार व्यापक होता गया। पाबंदी के बावजूद पहले से अधिक सुलभता से उपलब्ध हो रही है शराब। पहले सरकारी दुकानों पर मिलती थी शराब। अब पीनेवालों के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था है। जो शराब सरकारी खजाने को राजस्व से भरा करती थी, वही शराब धंधेबाजों और उनके संरक्षकों के आर्थिक साम्राज्य को विस्तार दे रही है।

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