सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है कंतित शरीफ उर्स मेला

Sun, Jan 29 , 2023, 03:48 AM

Source : Uni India

मिर्जापुर 29 जनवरी (वार्ता)। धर्म को लेकर इस काल में हो रहे विवादों के बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मिर्जापुर (Mirzapur) में लगने वाला कंतित शरीफ़ उर्स मेला आज भी साम्प्रदायिक सौहार्द का मिसाल पेश कर रहा है। हिन्दुओं के प्रसिद्ध मंदिर मां विंध्यवासिनी देवी के तलहटी में स्थित ख्वाजा इस्माइल चिश्ती (Khwaja Ismail Chishti) के दरगाह में हिन्दू परिवार द्वारा चादर चढ़ाने के बाद ही उर्स की शुरुआत होती है।यह परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी चादर चढाता चला आ रहा है। चार दिन के इस उर्स मेले में लाखों श्रद्धालु जियारत करते हैं। उर्स का मुख्य पर्व सोमवार को हैं।मेले में भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हिंदुओं के पवित्र शक्तिपीठ विंध्याचल से सटे कंतित शरीफ के संबंध में मान्यता है कि जो श्रद्धालु किन्ही कारणों से अजमेर शरीफ की यात्रा नहीं कर पाते हैं वे लोग कंतित शरीफ में मत्था टेक व चादर चढ़ाकर अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कृपा प्राप्त कर लेते हैं। वैसे भी अजमेर शरीफ की यात्रा शुरू करने या पूर्ण कर लेने के बाद भी यहां श्रद्धालु आते रहते हैं। हिंदुओं एवं मुसलमानों में समान रूप से लोकप्रिय यह उर्स मेला राष्ट्रीय सद्भावना की मिसाल को बनाए हुए हैं। मान्यता के अनुसार आज भी बाबा की मजार पर पहली चादर स्थानीय एक हिंदू कसेरा परिवार के लोगों द्वारा चढ़ाई जाती है इस चादर के चढ जाने के बाद ही कोई यहां चादर चढ़ाकर मत्था टेक सकता है हालांकि इस प्रथा के पीछे की कहानी अज्ञात है। अजमेर शरीफ के गरीब नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सगे भांजे ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह को लेकर यहां कई किवदंतियां हैं ।स्थानीय लोग इस्माइल चिश्ती के हैरतअंगेज कारनामों को बड़े गर्व से बताते हैं मोइनुद्दीन के भांजे इस्माइल के कथित आगमन को लेकर कोई पुष्ट एवं ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है पर जन श्रुतियो एवं राजपूत गहरवार राजाओं के ऐतिहासिकता को सर्वाधिक मान्यता दी जाती है।
मान्यता के अनुसार अवध राज्य की इस सूबे कंतित में कभी गहरवार राजपूतों का शासन था इसी वंश वृक्ष में दानव राय नामक एक राजपूत शासक ने अपनी दानव प्रवृत्तियों से जनता में आतंक पैदा कर दिया था इसी समय बाबा इस्माइल चिश्ती ने दानव राय के आतंक को अपने कारनामों से समाप्त कराया तभी से जनता में उनके प्रति आदर एवं सम्मान पैदा हुआ उन्हें देवदूत माना जाने लगा ।
गंगा के किनारे बसे इस गांव में राजपूत राजाओं का किला एवं बावड़ी के भग्नावशेष इन जन श्रुतियो को पुष्ट करते हैं विंध्य पर्वतमाला की गोद में बसा यह स्थल अपने चमत्कारों के साथ प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण होने से लोक प्रसिद्धि का कारण बना है। इस दरगाह के पश्चिम में हिंदुओं का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम अवस्थित है तो उत्तर में मां गंगा की धारा है । दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला की प्राकृतिक हरीतिमा इसकी शोभा में चार चांद लगा देते हैं
इन दिनों सारे मिल क्षेत्र में अनूठा दृश्य है जनता के मनोरंजन के लिए बनाए गए अस्थाई पंडाल तथा दूर-दूर तक फैले प्रसाद एवं चादर की दुकानें बरबस लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
मेला की सुरक्षा के विषय में पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को सेक्टर एवं जोन में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुरक्षा में स्थानीय पुलिस के जवानों के अतिरिक्त पीएसी के जवानों को भी तैनात किया गया है ।उन्होंने बताया कि यातायात के लिए अलग व्यवस्था की गई है ।भगदड़ की स्थिति पैदा ना हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मेले में सफाई पानी बिजली व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद की है।
मेले में किए गए व्यवस्था के संबंध में अंगद गुप्ता ने बताया कि मेला क्षेत्र में 24 घंटा सफाई कर्मी एवं अन्य कर्मियों को तैनात किया गया है श्रद्धालुओं की मौलिक सुविधाओं को दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

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