बाल श्रम के खिलाफ एकजुट हो विश्व बिरादरी

Sun, Jun 12 , 2022, 02:55 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

बेतिया, 12 जून (हि.स)। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (world child labor prohibition day) के अवसर पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसका विषय था "कोरोना संक्रमण काल के बाद बच्चों एवं बच्चियों पर घरेलू हिंसा (domestic violence) एवं बाल श्रम"। इस अवसर पर सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद अधिवक्ता ,डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, डॉशाहनवाज अली, अमित कुमार लोहिया, वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू शरण शुक्ल ,सामाजिक कार्यकर्ता नवीदू चतुर्वेदी, पश्चिमी चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन एवं अल बयान के संपादक डॉ. सलाम ने संयुक्त रूप से उन बच्चों एवं बच्चियों को श्रद्धांजलि अर्पित की ,जिन्होंने कोरोना संक्रमण काल, विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध ग्रस्त क्षेत्रों में अपने प्राणों की आहुति दी। इस अवसर पर डॉ एजाज अहमद एवं डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा कि विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि अफ्रीका, एशिया एवं प्रशांत क्षेत्रों में बाल श्रम से हर दस में से नौ बच्चों शिकार हैं।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने का उद्देश्य इन बच्चों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने 2002 मे बाल श्रम के खिलाफ पहला विश्व दिवस शुरू किया था। 12 जून को मनाए जाने वाले दिन का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ बढ़ते विश्वव्यापी आंदोलन के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करना है। बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस बाल श्रम के खिलाफ अभियान में व्यक्तिगत सरकारों और आईएलओ सामाजिक भागीदारों, नागरिक समाज और अन्य लोगों, स्कूलों, युवाओं और महिलाओं के समूहों के साथ-साथ मीडिया से और अधिक समर्थन प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को अपनाया, जिनमें से एक 2025 तक सभी रूपों में बाल श्रम को खत्म करना है। सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन, फकीराना सिस्टर्स सोसाइटी ,बचपन बचाओ आंदोलन कैलाश सत्यार्थी फाऊंडेशन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इस दिशा में ठोस एवं कारगर कदम उठाने के लिए संकल्पित है।
इस लक्ष्य के तहत बंधुआ मजदूरी को समाप्त करने, आधुनिक दासता12 और मानव तस्करी को समाप्त करने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करना और बाल सैनिकों की भर्ती और उपयोग सहित बाल श्रम के सबसे खराब रूपों के निषेध और उन्मूलन को सुरक्षित करना है एवं 2025 तक पूरी दुनिया से बाल श्रम समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष का थीम"बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण"है। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के आंकड़ों के अनुसार, आज भी 160 मिलियन बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं - इनमें से कुछ की उम्र पांच वर्ष से कम है।अफ्रीका, एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र मिलकर दुनिया भर में बाल श्रम में हर दस में से नौ बच्चों के लिए जिम्मेदार हैं।
भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 1.01 करोड़ बाल मजदूर हैं। अवसर पर वक्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र एवं विश्व बिरादरी से आह्वान करते हुए कहा कि 2025 तक पूरी दुनिया से बाल श्रम को समाप्त करने के लिए ठोस एवं सामाजिक स्तर पर जागरूकता लाने की आवश्यकता है ताकि हम सामाजिक एवं सरकारी प्रयासों (government efforts) से पूरी दुनिया से बाल श्रम उन्मूलन 2025 के लक्ष्य को पा सके।

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