Court Centre Fine: अनावश्यक मुकदमेबाजी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र सरकार पर लगाया 25,000 रुपये का जुर्माना !

Wed, Apr 01 , 2026, 09:13 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई और उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। न्यायालय ने सरकार को अदालतों में बढ़ते मुकदमों के बोझ के लिए एक बड़ा जिम्मेदार कारक बताते हुए कहा कि इस तरह की अनावश्यक अपीलें न्यायपालिका पर बोझ बढ़ाती हैं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की अपील को खारिज कर दिया, जिसमें एक सीआईएसएफ कांस्टेबल (CISF constable) को राहत दी गई थी। यह मामला एक सीआईएसएफ कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा था, जिसे अनधिकृत अनुपस्थिति और व्यक्तिगत विवाद के आरोपों में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने पाया कि कांस्टेबल की अनुपस्थिति स्वीकृत चिकित्सा अवकाश के दौरान थी और अन्य आरोप 'कदाचार' की श्रेणी में नहीं आते, जिसके बाद उसकी सजा रद्द कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने तंज कसते हुए कहा, "एक तरफ हम मुकदमों में देरी पर चिंता जताते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सरकार खुद सबसे बड़ी वादी बनी हुई है।" उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय आने के बजाय संयम बरतना चाहिए था। पीठ ने आश्चर्य जताया कि उच्च न्यायालय के राहत दिए जाने के बाद भी सरकार इस मामले को शीर्ष अदालत तक क्यों खींच लाई। अदालत ने इसे 'अनावश्यक मुकदमेबाजी' करार दिया जो केवल फाइलों का ढेर बढ़ाती है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस कारण नहीं है। सरकार की अपील को खारिज करते हुए उन पर 25,000 रुपये का हर्जाना लगाया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनावश्यक अपीलों पर रोक लग सके।

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