Drug Trafficking: ईडी ने मादक पदार्थ एवं धन शोधन से संबंधित मामलों में तीन आरोप पत्र दाखिल किए, त्रिपुरा की पीएमएलए अदालत में प्रस्तुत

Wed, Apr 01 , 2026, 12:57 PM

Source : Uni India

Tripura PMLA Special Court: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने त्रिपुरा में मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) और धन शोधन से निपटने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कम से कम तीन अभियोजन शिकायतें (आरोप पत्र) दर्ज किये हैं। इन आरोप पत्र को पश्चिम त्रिपुरा की पीएमएलए की विशेष अदालत (Tripura PMLA Special Court) में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें 14 व्यक्तियों को आरोपी के रूप में नामित किया गया है। ईडी ने अपराध की कमाई के रूप में पहचानी गई लगभग 6.85 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को या तो फ्रीज, जब्त या अस्थायी रूप से कुर्क भी किया है। ये सभी मामले मादक द्रव्य और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम (NDPS) Act), 1985 के तहत अपराधों से जुड़े हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी और उसके बाद अवैध कमाई का धन शोधन शामिल है।

पहला मामला पश्चिम त्रिपुरा के जिरानिया थाने में लिटन साहा और अन्य के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21(सी)/29 के तहत दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। त्रिपुरा पुलिस ने 31 मई, 2024 को सोनामुरा की विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर करने के बाद, ईडी की जांच में पता चला कि साहा ने कथित तौर पर कोडीन-आधारित कफ सिरप की तस्करी की थी, जिसमें पुलिस द्वारा जब्त की गई एस्कफ की 9,590 बोतलें शामिल थीं। साहा ने कथित तौर पर अवैध पदार्थों के परिवहन के लिए अपनी रसद कंपनी का उपयोग किया, जबकि एक वैध परिवहन व्यवसाय की आड़ में कई बैंक खातों के माध्यम से कमाए गये धन का शोधन किया।

दूसरा मामला उत्तरी त्रिपुरा के पानीसागर में 1,352 किलोग्राम सूखे गांजे और खोवाई जिले में फेनसेडिल कफ लिंक्टस की 14,400 बोतलों की जब्ती से संबंधित प्राथमिकियों से जुड़ा है। जांच से पता चला कि देबब्रत डे और अपु रंजन दास मादक पदार्थों की तस्करी का एक संगठित अंतरराज्यीय अभियान चलाते थे और त्रिपुरा से बिहार और अन्य पड़ोसी राज्यों में गांजा तथा मादक पदार्थों की आपूर्ति करते थे। इस नेटवर्क में एक सेवारत पुलिस अधिकारी, ध्रुव मजूमदार भी शामिल था, जिसे अपनी पत्नी के नाम पर अचल संपत्ति में अवैध आय का निवेश करते पाया गया था। ईडी ने तब से इस नेटवर्क से जुड़ी कई संपत्तियां कुर्क की हैं। 

तीसरा मामला त्रिपुरा में गांजे की बड़ी खेप की जब्ती के संबंध में 2020 और 2025 के बीच दर्ज कई प्राथमिकियों से संबंधित है। त्रिपुरा में 2015 से सक्रिय एक अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का मास्टर माइंड बिशु कुमार इसमें मुख्य आरोपी है। वह कामिनी देबबर्मा के साथ मिलकर काम करता था। दोनों ने मादक पदार्थों की तस्करी और नकली खातों, हवाला नेटवर्क, ईंट उद्योग में निवेश और अचल संपत्ति की खरीद के माध्यम से कमाए गये अवैध धन के शोधन की बात स्वीकार की है। इसी मामले में एक अन्य व्यक्ति विकास देववर्मा ने भी फर्जी खाते के माध्यम से वित्तीय लेनदेन की सुविधा प्रदान करने की बात स्वीकार की है।

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