International Womens Day : इंटरनेशनल विमेंस डे (International Womens Day) सिर्फ़ महिलाओं को शुभकामनाएँ देने का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लंबे संघर्ष, उनके अधिकारों और उपलब्धियों के लिए उनकी लड़ाई का सम्मान करने का दिन है। हर साल 8 मार्च को यह दिन पूरी दुनिया में जोश के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस तारीख के पीछे एक बड़ा ऐतिहासिक संदर्भ है। आइए इसके बारे में जानें।
'8 मार्च' तारीख का इतिहास
8 मार्च को तारीख तय होने के पीछे मुख्य कारण रूस में महिलाओं का आंदोलन है।
न्यूयॉर्क में लड़ाई (1908): महिलाओं के संघर्ष की चिंगारी 1908 में न्यूयॉर्क में गिरी थी। लगभग 15,000 महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और वोट देने के अधिकार की माँगों के लिए मार्च किया था।
इंटरनेशनल विमेंस कॉन्फ्रेंस (1910) का प्रस्ताव: जर्मन सोशलिस्ट क्लारा ज़ेटकिन ने कोपेनहेगन में हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में हर साल विमेंस डे मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे मान लिया गया।
रूसी क्रांति और 8 मार्च (1917): पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान, रूस में महिलाओं ने 23 फरवरी, 1917 (जूलियन कैलेंडर) को ‘ब्रेड एंड पीस’ की मांग को लेकर एक ऐतिहासिक हड़ताल की। उस समय रूस में इस्तेमाल होने वाले जूलियन कैलेंडर में 23 फरवरी, ग्रेगोरियन कैलेंडर (जिसे हम आज इस्तेमाल करते हैं) में 8 मार्च था।
ऑफिशियल मान्यता: रूस में इस आंदोलन के बाद, 8 मार्च को विमेंस डे के नाम से जाना जाने लगा। बाद में, 1975 में, यूनाइटेड नेशंस (UN) ने ऑफिशियली 8 मार्च को ‘इंटरनेशनल विमेंस डे’ के तौर पर मान्यता दी।
विमेंस डे का महत्व
यह दिन समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने और उनकी तरक्की में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए है।
अचीवमेंट की पहचान: साइंस, आर्ट, स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स और सोशल वर्क जैसे सभी फील्ड में महिलाओं की अचीवमेंट्स को सेलिब्रेट किया जाता है।
इक्वालिटी के लिए अवेयरनेस: सैलरी इक्वालिटी, एजुकेशनल मौके और काम की जगह पर सेफ्टी जैसे मुद्दों पर चर्चा करके अवेयरनेस पैदा की जाती है।
विमेन एम्पावरमेंट: इस दिन महिलाओं को उनके राइट्स के बारे में अवेयर करने और उन्हें सेल्फ-रिलायंट बनाने के लिए कई तरह की एक्टिविटीज़ की जाती हैं।
भले ही आज महिलाएं सभी फील्ड्स में सबसे आगे हैं, लेकिन जेंडर डिस्क्रिमिनेशन और ज़ुल्म जैसी चैलेंजेस पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं। इसलिए, 8 मार्च सिर्फ सेलिब्रेशन का दिन नहीं है, बल्कि महिलाओं के राइट्स के लिए लगातार कोशिश करने का संकल्प लेने का दिन है।



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