Bailable warrants issued: हिज्बुल प्रमुख सलाह-उद-दीन समेत चार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी!

Fri, Feb 27 , 2026, 08:35 PM

Source : Uni India

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की एक अदालत (court) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाह-उद-दीन और तीन अन्य अहम सदस्यों के खिलाफ आतंकवाद के तीन दशक पुराने मामले में गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किये हैं। ये वारंट काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) द्वारा दर्ज एफआईआर के तहत हासिल किए गए। मामला रणबीर दंड संहिता की धाराओं 121, 121-ए, 153-ए और 153-बी, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 तथा दुश्मन एजेंट अध्यादेश की धाराओं 2/3 के तहत दर्ज है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टाडा/पोटा (एनआईए अधिनियम के तहत नामित) श्रीनगर की अदालत ने सलाह-उद-दीन के अलावा गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान (श्रीगुफवाड़ा, अनंतनाग), शेर मोहम्मद उर्फ बहादुर उर्फ रियाज (मलंगाम, बांदीपोरा) और नासिर यूसुफ कादरी (हब्बाकदल, श्रीनगर) के खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी किए। 

सलाह-उद-दीन वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहा है। पुलिस के अनुसार, बडगाम के सोइबुग निवासी सलाह-उद-दीन संयुक्त जिहाद परिषद का प्रमुख है और घाटी में कई आतंकवाद संबंधी मामलों में वांछित है। गुलाम नबी खान को संगठन का डिप्टी सुप्रीम कमांडर बताया गया है, जो भर्ती और समन्वय गतिविधियों में शामिल रहा है। शेर मोहम्मद पर आतंकवाद से जुड़े विभिन्न मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं। वहीं, नासिर यूसुफ कादरी पर संगठन के प्रचार तंत्र के लिए काम करने और 'कश्मीर मीडिया सर्विस' के माध्यम से भारत विरोधी प्रचार फैलाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला 5 अप्रैल 1996 का है, जब सूचना मिली थी कि पाकिस्तान स्थित संचालक कश्मीरी युवाओं को सीमा पार हथियार प्रशिक्षण के लिए उकसा रहे थे ताकि भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके। जांच में आरोपियों की कथित संलिप्तता कट्टरपंथीकरण, भर्ती और आतंकी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में पाई गई।

सीआईके के लगातार प्रयासों के बावजूद सभी आरोपी अब तक फरार हैं और गिरफ्तारी से बचते रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोप राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे गंभीर अपराधों से संबंधित हैं और प्रभावी जांच के लिए आरोपियों की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने पुलिस स्टेशन सीआईके के थाना प्रभारी/जांच अधिकारी को वारंट निष्पादित कर आरोपियों को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम लंबित आतंकी मामलों (Terror Cases) को आगे बढ़ाने और फरार आरोपियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए सीआईके के सतत प्रयासों को दर्शाता है।

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