Tea in a Plastic Cup : क्या आप ऑफिस में प्लास्टिक के कप में चाय पीते हैं? यह आदत जानलेवा हो सकती है!

Wed, Feb 18 , 2026, 10:30 PM

Source : Uni India

Paper Cup Health Risks: ऑफिस के बाहर चायदानी से आती गर्म चाय की महक... सीधे पॉलीथीन बैग या पतले प्लास्टिक कप में आपकी टेबल तक पहुंचना, यह रोज़ की आदत आरामदायक लग सकती है। लेकिन यह सेहत (health) के नज़रिए से एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना ​​है कि जब गर्म चाय को खराब क्वालिटी के प्लास्टिक या पॉलीथीन में डाला जाता है, तो उसके केमिकल ड्रिंक में मिल सकते हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, 60 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान पर थैलेट्स, बिस्फेनॉल A (BPA) और स्टाइरीन जैसे नुकसानदायक तत्व चाय में मिल सकते हैं। ये चीज़ें शरीर के हार्मोनल सिस्टम पर असर डालती हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये केमिकल एंडोक्राइन डिसरप्टर के तौर पर काम करते हैं। यानी, ये एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड जैसे हार्मोन के बैलेंस को बिगाड़ देते हैं। अगर कोई व्यक्ति दिन में 2 से 4 बार यह चाय पीता है, तो लगातार थोड़ी मात्रा में भी इसका शरीर पर कुल मिलाकर असर हो सकता है। इसका नतीजा हार्मोन इम्बैलेंस, इनफर्टिलिटी, वज़न बढ़ना, थकान, नींद की दिक्कत, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज़ जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कुछ एक्सपर्ट्स ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर का खतरा बढ़ने का सुझाव देते हैं।

रिसर्च क्या कहती है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लैब और जानवरों पर हुई स्टडीज़ से पता चला है कि ये केमिकल्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर DNA को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे कैंसर हो सकता है। हाल की रिसर्च ने भी चिंता जताई है। कुछ स्टडीज़ में पाया गया है कि डिस्पोजेबल कप में परोसे जाने वाले गर्म ड्रिंक्स में हज़ारों माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स हो सकते हैं। IIT खड़गपुर के रिसर्चर्स के मुताबिक, सिंगल-यूज़ कप के लंबे समय तक इस्तेमाल से किसी व्यक्ति के शरीर में कई ग्राम प्लास्टिक जमा हो सकता है। साथ ही, विदेशों में हुई रिसर्च में इंसान के ब्रेन टिशू में माइक्रोप्लास्टिक के निशान मिले हैं।

देश में क्या हैं नियम?

बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) ने भारत में फ़ूड-ग्रेड प्लास्टिक के इस्तेमाल की इजाज़त दी है। लेकिन असल में, सस्ते और रीसायकल किए गए प्लास्टिक का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में हो रहा है। ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि गर्म चाय हमेशा कांच, स्टील या सिरेमिक के बर्तनों में ही पीनी चाहिए। कुल्हड़ या मिट्टी के कप भी काफ़ी सुरक्षित ऑप्शन माने जाते हैं।

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