वाशिंगटन। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों पर अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर (S. Paul Kapur) ने घोषणा की है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी प्रभुत्व (Chinese dominance) को रोकने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र भारत जरूरी है। मंत्री ने संसदीय सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। संसदीय सुनवाई में दक्षिण और मध्य एशिया के रणनीतिक महत्व पर व्यापक सहमति दिखाई दी, हालांकि चीन के बढ़ते प्रभाव और राजनीतिक उथल-पुथल वाले इस क्षेत्र में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर सांसद गहराई से विभाजित नजर आए। कपूर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति का उद्देश्य केवल चीन को रोकना नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में संतुलन और संप्रभुता बनाये रखना है। सुनवाई के दौरान व्यापार, कूटनीति और अफगानिस्तान नीति (Afghanistan policy) पर तीखे दलीय मतभेद हावी रहे। सांसदों ने इस पर बहस की कि अमेरिका को चीन के प्रभाव का मुकाबला कैसे करना चाहिए और दक्षिण एवं मध्य एशिया में तेजी से बदलते राजनीतिक बदलावों पर क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
सत्र की शुरुआत करते हुए अध्यक्ष और प्रतिनिधि बिल हुइज़ेंगा ने कहा, "दक्षिण और मध्य एशिया उपसमिति की कार्यवाही शुरू की जाती है। इस सुनवाई का उद्देश्य दक्षिण मध्य एशिया में अमेरिका की विदेश नीति की जांच करना है।" उन्होंने इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बताया और कहा कि वहां अमेरिकी रणनीति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और हमारी वैश्विक उपस्थिति की कुंजी है। हुइज़ेंगा ने कहा कि दक्षिण और मध्य एशिया 'लगभग दो अरब लोगों, गतिशील अर्थव्यवस्थाओं और रणनीतिक जलमार्गों का घर है जो भारत-प्रशांत में शक्ति संतुलन को आकार देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 'हमारा जुड़ाव आने वाले दशकों के लिये एशिया में अमेरिका की भूमिका को परिभाषित करेगा।
अध्यक्ष ने आगाह किया कि चीन 'अपनी 'बेल्ट एंड रोड' पहल के माध्यम से अपने सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने के लिये 'दमनकारी ऋण' देता है और छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने अपनी सैन्य आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करते हुए भारत, नेपाल और भूटान के साथ अपनी सीमाओं को मजबूत किया है। हुइज़ेंगा ने वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से का वहन करने वाले हिंद महासागर को 'दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री गलियारों में से एक' बताते हुए कहा कि 'एक स्वतंत्र और खुला हिंद महासागर हमारी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्राथमिकता है।' उन्होंने डिएगो गार्सिया द्वीप समूह पर अमेरिकी नौसेना सुविधा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मजबूती बनाए रखने से चीनी दबाव को रोकने, समुद्री डकैती को खत्म करने और अमेरिकी एवं विश्व व्यापार के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।



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