महाशिवरात्रि 2026: महाशिवरात्रि के दिन शिव भक्त भगवान शिव के दर्शन (blessings of Lord Shiva) करने मंदिर जाते हैं। वे पूरे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं। महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन शिव भक्त भगवान शिव के दर्शन करने मंदिर जाते हैं। वे पूरे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं। साथ ही, मुंबई के कुछ मशहूर शिव मंदिरों में पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। तो इस साल, आपको भी महाशिवरात्रि पर इन मशहूर शिव मंदिरों में जाना चाहिए। साथ ही, मुंबई के मालाबार हिल में 'वाकेश्वर मंदिर' एक पुराना शिव मंदिर है और यह मंदिर कई भक्तों के लिए पूजा की जगह है।
मुंबई के अंबरनाथ में भगवान शिव का शिव मंदिर एक पुराना मंदिर है और यह मूर्तियों से सजा हुआ एक बहुत ही सुंदर शिव मंदिर है। इसके साथ ही, मुंबई के वसई-विरार में मौजूद तुंगारेश्वर शिव मंदिर बहुत पुराना मंदिर है और यहां का खूबसूरत माहौल भक्तों को बहुत पसंद आता है। बोरीवली का ओंकारेश्वर मंदिर मुंबई का एक मशहूर शिव मंदिर है और इस मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। आप महाशिवरात्रि के मौके पर मुंबई के इन मशहूर शिव मंदिरों में जा सकते हैं।
महाशिवरात्रि पर भांग क्यों पी जाती है? जानिए धार्मिक कारण
महाशिवरात्रि और भांग का संबंध गहरा भी है और दिलचस्प भी। अक्सर लोग इसे केवल मौज-मस्ती से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। शिवजी को भांग अर्पित करने और भांग पीने का प्रचलन प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। यहाँ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि महाशिवरात्रि पर भांग का सेवन क्यों किया जाता है और कैसे उतारे भांग का नशा।
1. हलाहल विष का प्रभाव कम करना
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब ‘हलाहल’ नामक भयंकर विष निकला, तो ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की तीव्रता से शिव का शरीर अत्यधिक गर्म होने लगा। मान्यताओं के अनुसार, भांग, धतूरा और बेलपत्र जैसी औषधियों में शीतलता होती है, जिनका उपयोग शिव के शरीर की गर्मी और विष के प्रभाव को शांत करने के लिए किया गया था। देवताओं ने इसका लेप बनाकर उनके शरीर पर लगाया था।
2. शिव के ‘आनंद’ स्वरूप का प्रतीक
भगवान शिव को ‘औघड़’ और ‘विरागी’ माना गया है। वे संसार के मोह-माया से दूर गहरे ध्यान में रहते हैं। भांग को एक ऐसी औषधि माना जाता है जो एकाग्रता बढ़ाने और मन को बाहरी दुनिया से काटकर अंतर्मन से जोड़ने में मदद करती है। भक्त इसे शिव के इसी दिव्य आनंद के प्रसाद के रूप में लेते हैं, लेकिन यहां यह स्पष्ट करना है कि शिवजी भांग नहीं पीते थे। प्राचीन काल में भांग को एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना जाता था। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास में आती है, जब मौसम बदल रहा होता है। आयुर्वेद के अनुसार, सीमित मात्रा में भांग का सेवन पाचन में सुधार और शरीर की थकान दूर करने में सहायक होता था। इसे ‘विजया’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है दुखों और रोगों पर विजय पाने वाली।



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Fri, Feb 13 , 2026, 04:39 PM