नयी दिल्ली। देश में विनिर्माण क्षेत्र पर उद्योग मंडल फिक्की की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 की तीसरी तिमाही में फिक्की (FICCI) मैन्यूफैक्चरिंग इंडेक्स अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जो इकाइयों में कारोबार की वृद्धि और बाजार के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। फिक्की की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस रिपोर्ट के लिए जिन इकाइयों से सम्पर्क किया गया उनमें 91 प्रतिशत ने कहा कि उनका उत्पादन पिछली तिमाही से ऊंचा या उसके समान चल रहा था। यह दूसरी तिमाही की तुलना में स्थिति में सुधार को दर्शाता है जबकि 87 प्रतिशत ने इस तरह की रिपोर्ट दी थी। विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों पर फिक्की के तिमाही सर्वे के इस 68वें संस्करण के अनुसार इस सर्वे ने 86 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने तीसरी तिमाही में उच्च या समान ऑर्डर की उम्मीद जताई ।यह उम्मीद गत सितंबर में जीएसटी (GST rate) में घोषित कटौती के बाद और बढी है।
फिक्की की इस ताजा रिपोर्ट में ऑटो कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स, केमिकल्स, फर्टिलाइजर्स और फार्मास्यूटिकल्स, (Pharmaceuticals) इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल, मशीन टूल्स, मेटल और मेटल प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल्स, अपैरल और टेक्निकल टेक्सटाइल्स और विविध उत्पाद- इन आठ प्रमुख क्षेत्रों के निर्माताओं के अक्टूबर-दिसंबर 2025-26 के प्रदर्शन और भावनाओं का आकलन किया गया है। इसमें बड़ी और लघु तथा मझोली दोनों वर्गों की विनिर्माण इकाइयों को शामिल किया गया जिनका कुल वार्षिक कारोबार तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
सर्वे के अनुसार तीसरी तिमाही में विनिर्माण क्षमता का उपयोग लगभग 75 प्रतिशत था जो इस क्षेत्र में लगातार आर्थिक गतिविधि को दर्शाता है। सर्वें के निष्कर्षों के अनुसार अगले छह महीनों में निवेश और विस्तार के प्रति दृष्टिकोण मजबूत है।
फिक्की ने कहा कि क्षमता विस्तार के मामले में इकाइयों ने वैश्विक और भू-राजनीतिक कारकों ( अमेरिका जैसे बाजार में ऊंचे शुल्क , व्यापार प्रतिबंध, आर्थिक अनिश्चितता), तथा देश में उपयुक्त श्रम और कच्चे माल की उपलब्धता तथा नियामकीय विषयों को चुनौती बताया।
रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में विनिर्माताओं की इन्वेंटरी कम हुई जो कारोबार में तेजी का संकेत है। दूसरी तिमाही में लगभग 90 इकाइयों की इन्वेंटरी उससे पहले तिमाही से ज्यादा या समान स्तर की थी। तीसरी तिमाही में इस तरह की सूचना देने वाली इकाइयों का अनुपात लगभग 83 प्रतिशत था इसी तरह दूसरी तिमाही में लगभग 69 प्रतिशत की तुलना में तीसरी तिमाही में 70 प्रतिशत से ज़्यादा इकाइयों ने उम्मीद जतायी कि उनका निर्यात पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में ज़्यादा या पहले उसके स्तर पर रहेगा। इस सर्वे में 38 प्रतिशत इकाइयों ने कहा कि वे अगले तीन महीनों में भर्ती बढ़ाने का विचार कर रही हैं। यह साल पहले ऐसा कहने वाली इकाइयों का अनुपात 35 प्रतिशत था। सर्वे के अनुसार तीसरी तिमाही में विनिर्माताओं को कर्ज पर औसतन 8.9 प्रतिशत ब्याज पड़ रहा था। 87 प्रतिशत ने कहा कि रोजमर्रा के काम के लिए और दीर्घकालिक पूंजीगत खर्च के लिए बैंकों से पर्याप्त कोष मिल रहा है।



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