Maharashtra Election Ink Controversy : मार्कर पेन के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की सफाई!

Thu, Jan 15 , 2026, 10:49 PM

Source : Uni India

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) ने यह शिकायत मिलने के बाद कि इस बार मतदाओं को लगायी जाने वाली 'मार्कर स्याही' (marking voters) मिट जा रही है, उसने इसका बचाव करते हुए पुराने फैसले का हवाला दिया है। आयोग के अधिकारी ने कहा कि उंगलियों पर मार्कर से स्याही लगाने का निर्देश 2011 में ही जारी किया गया था और यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद रहे, ताकि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान न कर सके।

मुंबई के गोरेगांव, अंधेरी, मलाड, पवई और कांदिवली के कई बूथों के मतदाओं ने आरोप लगाया कि मतदान के बाद चुनाव अधिकारियों ने उंगलियों पर स्याही लगाने के लिए साधारण मार्कर का इस्तेमाल किया। सिर्फ सरकार की बनायी हुई कभी न मिटने वाली स्याही इस्तेमाल करने के आम तरीके से इस तरह के बदलाव के बारे में पहले से कोई जानकारी न होने पर मतदाताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाया। कोल्हापुर जिले और पुणे से भी वोटरों की उंगलियों पर लगी स्याही के निशान आसानी से मिटने की ऐसी ही घटनाएं सामने आयीं।

वोटरों की शिकायतों पर महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (Maharashtra State Election Commission) ने सफाई देते हुए कहा, "वोटर्स की उंगलियों पर 'पक्की स्याही' लगाने के लिए मार्कर के इस्तेमाल के बारे में 19 नवंबर 2011 और 28 नवंबर 2011 को आदेश जारी किये गये थे। तब से स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान बाद के निशान के लिए मार्कर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आदेशों के मुताबिक, मार्कर से स्याही को नाखून और नाखून के ऊपर की स्किन पर तीन-चार बार रगड़-रगड़कर साफ-साफ लगाना है, ताकि निशान साफ दिखे। ये निर्देश मतदान के दौरान इस्तेमाल होने वाले मार्कर पर भी अंकित होते हैं।"

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने कहा, "इन कदमों के मद्देनजर आयोग मतदाताओं से अपील करता है कि वे स्याही हटाने की कोशिश जैसी कोई भी गलत हरकत न करें और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाये रखें। दुविधा पैदा करने या दोबारा वोट देने की कोशिश करने के इरादे से मतदाताओं की उंगली पर लगी स्याही को हटाने की कोशिश करने पर कानूनन सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति स्याही हटाने के बाद दोबारा मत डालने की कोशिश करता पाया जाता है तो उस मतदाता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी।"

आयोग ने कहा, "अगर कोई मतदाता स्याही मिटा भी लेता है, तो दोबारा मतदान संभव नहीं है। पहले से ही काफी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, क्योंकि मतदाताओं के मत डालने के बाद उसका रिकॉर्ड रखा जाता है। इसलिए, सिर्फ स्याही हटाने से मतदाता दोबारा वोट नहीं डाल सकता।" इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नागपुर में मत डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए आयोग के अधिकारियों के आम मार्कर के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा, "ये सभी चीजें चुनाव आयोग तय करता है। मार्कर का इस्तेमाल पहले भी कई बार हो चुका है। अगर किसी को इस पर एतराज है तो चुनाव आयोग को इस पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि कुछ लोग जानबूझकर आज ही कुछ चीजों पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं, कल के नतीजों का अनुमान लगा रहे हैं। इससे साफ पता चलता है कि वे (विपक्षी पार्टियां) कल के नतीजों के बाद किसी पर इल्जाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं।"

इसके मद्देनजर आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रुबेन मैस्करेन्हास ने गुरुवार को मुंबई में मतदान शुरू होने के कुछ घंटों बाद महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराया। मैस्करेन्हास ने एक्स पर वीडियो के साथ ट्वीट किया, "जैसा मैं इस वीडियो में दिखा रहा हूं, सरकार निर्मित 'अमिट स्याही' के बजाय मार्कर के उपयोग से मतदाताओं की उंगलियों पर निशान बनाये जा रहे हैं, जिन्हें 'नेल पॉलिश रिमूवर' से आसानी से मिटाया जा सकता है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। चुनावों को मजाक में बदला जा रहा है," गुरुवार को दादर के बालमोहन विद्यालय मतदान बूथ पर मतदान के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के संस्थापक और प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जतायी, "पूरी प्रशासनिक मशीनरी सत्तारुढ़ पार्टी को जिताने के लिए काम कर रही है। मतदान प्रक्रिया में मतदाताओं की उंगलियों पर पहले जो स्याही लगायी जाती थी, उसकी जगह अब मतदाताओं की उंगलियों पर मार्कर से स्याही लगायी जा रही है। हैंड सैनेटाइजर के उपयोग से यह स्याही मिट रही है। हम इसे रोकने के लिए काम कर रहे हैं। इस तरीके से सत्ता में आना जीत नहीं कहलाता।"

श्री राज ठाकरे ने कहा, "सत्तारुढ़ पार्टी ने किसी भी तरीके से चुनाव जीतने का निर्णय लिया है। जब हमने दो बार मतदान करने वाले मतदाताओं का मुद्दा उठाया तो चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमने वीवीपैट मशीनों का मुद्दा भी उठाया, लेकिन इस बार यहां कोई वीवीपैट मशीन नहीं हैं। इसलिए हमें नहीं पता कि हमने जिसे मत दिया है, वह हमारे उम्मीदवार को गया या नहीं।"

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