क्या है संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की पॉलिटिकल तस्वीर? किसकी होगी जीत और कौन हारेगा?

Mon, Jan 05 , 2026, 03:30 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Chhatrapati Sambhaji Nagar Municipal Corporation Elections 2026: छत्रपति संभाजीनगर में पॉलिटिकल लड़ाई (political battle) दूसरे शहरों के मुकाबले ज़्यादा तीखी और अलग लग रही है। चुनाव में कैंडिडेट चुनते समय पार्टी लॉयल्टी से ज़्यादा 'विंगिंग कैपेसिटी (winning capacity)' को अहमियत दी गई है। कई वर्कर ने उन पार्टी नेताओं से टिकट न मिलने पर तुरंत अपना रुख बदल लिया है जिनके साथ उन्होंने फोटो खिंचवाई थी। (Sambhajinagar Election 2026)

छत्रपति संभाजीनगर में क्या है पॉलिटिकल सिचुएशन?
पॉलिटिक्स में अब कोई 'लॉयल्टी' या वफ़ादारी नहीं बची है, यह सिचुएशन किसी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के टेंडर प्रोसेस जैसी हो गई है। ऐसा लगता है कि चुनाव का मैदान भी रूलिंग पार्टी और रूलिंग पार्टी के बीच ऐसी ही लड़ाई होगी। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी आइडियोलॉजी को लागू करने के लिए लंबे समय तक शिवसेना का इस्तेमाल किया, जो अब बदलने लगी है। बीजेपी ने राशिद मामू जैसे पूर्व मेयर को टक्कर देने के लिए उद्धव ठाकरे ग्रुप की आलोचना करके इसे कैंपेन का मुद्दा बना लिया है।

शिवसेना में फूट के बाद ऐसा लग रहा है कि BJP उद्धव ठाकरे ग्रुप (Uddhav Thackeray group) को साइडलाइन करने की खास कोशिश कर रही है। BJP का मेन मकसद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में किसी को भी मेयर बनाना है और इसके लिए वे कुछ सीटें गंवाने को भी तैयार हैं। शहर की पॉलिटिकल डेमोग्राफ़ी को देखते हुए, BJP अपनी मौजूदगी मज़बूत करने के लिए 'पैठ' बना रही है। एक इंटरनल सर्वे के मुताबिक, अंदाज़ा है कि MIM पार्टी इस चुनाव में 25 से 30 सीटें जीतकर बड़ा असर डाल सकती है।

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर किसका झंडा है?
जैसे-जैसे माइनॉरिटी कम्युनिटी में कांग्रेस का असर कम हुआ है, MIM उनके लिए अकेला बड़ा ऑप्शन बनकर उभर रही है। कांग्रेस और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी जैसी विरोधी पार्टियों का ऑर्गनाइज़ेशन फिलहाल टूटा हुआ लगता है और उनके पास कोई ठोस नैरेटिव नहीं है। बगावत सिर्फ़ एक पार्टी में नहीं है, बल्कि BJP और शिवसेना जैसे दोनों रूलिंग ग्रुप्स में बड़ी संख्या में देखी जा रही है। शहर के कई पुराने वर्कर्स में बहुत नाराज़गी है क्योंकि 20-30 साल काम करने के बाद भी उन्हें बाहर कर दिया गया है।

शहर में पानी का मुद्दा सबसे गंभीर मुद्दा है और साल के 365 दिनों में से सिर्फ़ 50-60 दिन ही पानी मिलता है। कोई भी बड़ी पॉलिटिकल पार्टी नगर निगम में हाउसिंग स्कैम या टेंडर में करप्शन पर बात करने को तैयार नहीं है। हालांकि शहर में सड़कों की हालत सुधरी है, लेकिन इसका क्रेडिट एडमिनिस्ट्रेशन के बजाय मिनिस्ट्री से फंड लाने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स को दिया जा रहा है। चुनाव के आखिरी फेज में धार्मिक पोलराइजेशन और 'खान बनाम बान' जैसे मुद्दे फिर से सामने आने की संभावना है। टूरिस्ट कैपिटल रहे इस शहर में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, मेडिकल फैसिलिटी और इंडस्ट्रीज़ के कोऑर्डिनेशन जैसे बेसिक मुद्दे चर्चा से गायब हैं।

Latest Updates

Latest Movie News

Get In Touch

Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.

Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265

info@hamaramahanagar.net

Follow Us

© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups