तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार के नगर पालिकाओं और पंचायतों (municipalities and panchayats) के अधीन विभिन्न संस्थानों के अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने के फैसले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। केरल भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा (Kerala BJP Scheduled Caste Morcha) ने इस कैबिनेट निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शाजुमोन वट्टेक्काड ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) के लिए आरक्षित 10 प्रतिशत कोटे का हनन है। उन्होंने तर्क दिया कि जब अनुसूचित जाति संवर्ग के हजारों योग्य उम्मीदवार लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को पास कर और एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में पंजीकृत होकर सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ऐसे में अस्थायी कर्मियों को नियमित करना उनके साथ 'घोर अन्याय' है। भाजपा नेता ने केरल सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा यह पार्टी कैडर को लाभ देने के लिए उठाया जा रहा है।
यह वास्तव में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्तारूढ़ दल माकपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं को पिछले दरवाजे से सरकारी नौकरी देने की साजिश है। इन भर्तियों को संवैधानिक मानदंडों के विपरीत जाकर नियमित किया जा रहा है। भाजपा ने कहा है कि उनकी मांग है कि कैबिनेट के इस विवादास्पद फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सभी नियुक्तियां केवल लोक सेवा आयोग और रोजगार कार्यालयों के माध्यम से ही की जाएं और ऐसी भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति सहित सभी आरक्षण नियमों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो।



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