तिरुवनंतपुरम। केरल (Kerala) में आगामी नौ और 11 दिसंबर को होने वाले दो-चरणीय स्थानीय निकाय चुनावों के लिए पूरे राज्य में 33,711 मतदान केंद्र स्थापित किये जायेंगे जिनमें से 28,127 केंद्र तीन-स्तरीय पंचायतों में, 3,569 नगरपालिकाओं में और 2,015 नगर निगमों में कार्य करेंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी मतदान (voting) केंद्रों में हरित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला चुनाव (Election) अधिकारियों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
स्थानीय निकाय सचिवों को निर्देश दिया गया है कि मतदान दिवस (polling day) पर उत्पन्न होने वाले कचरे को पर्यावरण मानकों के अनुसार अलग करके निस्तारित किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर हरिता कर्मा सेना की सेवाएं ली जाएं। मतदान केंद्रों के रूप में नामित सभी भवनों में बिजली, पेयजल, शौचालय और आवश्यक फर्नीचर (Electricity, drinking water, toilets and necessary furniture) उपलब्ध होना चाहिए। बाहर प्रतीक्षा कर रहे मतदाताओं के लिए बेंच, कुर्सियां और छायादार स्थान जैसे पर्याप्त इंतज़ाम भी किए जाएं।
आयोग ने अधिकारियों को वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। जहां स्थायी रैंप उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ अस्थायी रैंप लगाए जाएँ और मतदान केंद्रों के अंदर या निकट विश्राम स्थलों की व्यवस्था की जाए।
आयोग ने कहा कि दृष्टिबाधित मतदाताओं, दिव्यांग व्यक्तियों, मरीजों और बुजुर्गों को बिना कतार में लगे मतदान की अनुमति दी जानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर कोई सहायक उनके साथ जा सकता है।
आयोग ने कहा कि मतदान दिवस तथा उससे एक दिन पूर्व सभी जगहों पर रोशनी और पंखे पूरी तरह क्रियाशील होने चाहिए। जहां पानी या बिजली उपलब्ध नहीं है, वहां केएसईबी और जल प्राधिकरण के स्थानीय कार्यालयों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संपर्क किया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी व्यवस्थाएं की जानी चाहिए।
आयोग ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी केंद्र में अपर्याप्त रोशनी नहीं होनी चाहिए और आवश्यकता होने पर पास के संस्थानों या घरों की मदद से आपातकालीन शौचालय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। जिला अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि कूडुंबश्री के सहयोग से मतदान कर्मियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने की संभावना तलाशें। अंदरूनी क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों तक जाने वाली सड़कों को साफ किया जाए और परिसर की सफाई मतदान से कम से कम दो दिन पहले कर दी जाए।
उन्होंने कहा कि मतदान दलों के पहुंचने तक मतदान केंद्र पूरी तरह साफ और प्रारंभिक प्रक्रिया के लिए तैयार होने चाहिए। स्थानीय सचिवों को मतदान दिवस पर सभी व्यवस्थाएं पुख्ता करनी होंगी और चुनाव के बाद परिसर को साफ अवस्था में वापस करना होगा। जिला कलेक्टरों को इन निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आयोग ने यह भी कहा कि मट्टनूर नगरपालिका को छोड़कर तिरुवनंतपुरम जिले में 3,264 मतदान केंद्र होंगे। अन्य जिलों में कोल्लम में 2,720, पथानामथिट्टा में 1,225, अलप्पुझा में 2,085, कोट्टायम में 1,925, इडुक्की में 1,192, एर्नाकुलम में 3,021, त्रिशूर में 3,282, पलक्कड़ में 3,054, मलप्पुरम में 4,343, कोझिकोड में 3,097, वायनाड मे 828, कन्नूर मे 2,305 और कासरगोड में 1,370 मतदान केंद्र होंगे।
इस बीच, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) केवल चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के लिए उपलब्ध होंगे। केरल पंचायत राज और नगरपालिका अधिनियमों के तहत डाक मतपत्र किसी अन्य वर्ग को नहीं दिए जा सकते।
उन्होंने कहा कि 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान जब कोरोना महामारी चरम पर थी, तब भी डाक मतपत्र केवल ड्यूटी स्टाफ तक सीमित थे, जबकि विशेष मतपत्र केवल कोविड-19 रोगियों और क्वारंटीन में रहने वालों को दिए गए थे। आयोग ने कहा कि आवेदन प्राप्त होने पर डाक मतपत्र जारी किए जाएंगे और अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करते समय अपनी चुनाव ड्यूटी आदेश की प्रति संलग्न करनी होगी।
आवेदन उस वार्ड के रिटर्निंग अधिकारी को जमा करने होंगे, जिसमें आवेदक पंजीकृत है। डाक विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि मतपत्र प्राप्त करने या वापस भेजने के लिए आवेदकों को डाक टिकटों की आवश्यकता न पड़े।



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