नागपुर। महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने मंगलवार को कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Chief Minister Uddhav Thackeray) के कार्यकाल के दौरान स्थानीय स्वशासन निकायों के चुनाव (Election) में ओबीसी (OBC) के लिए आरक्षण समाप्त कर दिया गया था लेकिन एनडीए सरकार ने अदालत (Court) के माध्यम से इसे पुनः प्राप्त कर लिया।
हालांकि, इसे चुनौती देते हुए अवमानना याचिका दायर की गई। इस संबंध में के. कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ के फैसले का हवाला दिया गया।
श्री फडणवीस ने कहा, "यह मामला अभी अदालत में चल रहा है। हम अदालत के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार स्थानीय स्व-सरकारी निकायों के चुनाव ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ कराने जा रही है।"
उच्चतम न्यायालय का स्पष्ट निर्देश है कि स्थानीय स्वशासन निकायों में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। हालांकि, राज्य चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई छूटों में कई जगहों पर यह सीमा पार हो गई है। नतीजतन, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगमों और जिला परिषदों के चुनाव अधर में लटक गए हैं। इस पर अदालती सुनवाई टल गई है।
चार मार्च, 2021 को महाराष्ट्र राज्य सरकार बनाम विकास गवली मामले में, उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' अनिवार्य कर दिया था। यह स्पष्ट किया था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए संयुक्त आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही रहना चाहिए।
इससे पहले 11 मई 2010 को न्यायमूर्ति के. कृष्णमूर्ति सहित तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भी ऐसा ही आदेश दिया था। हालांकि, आयोग ने एससी-एसटी जनसंख्या के आधार पर आनुपातिक आरक्षण के बजाय ओबीसी के लिए एक समान 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। इसके कारण कई जगहों पर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज़्यादा हो गया।



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Wed, Nov 26 , 2025, 10:44 AM