बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद उप्र में नए प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट

Sat, Nov 22 , 2025, 12:27 PM

Source : Uni India

लखनऊ: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) में एक बार फिर नए प्रदेश अध्यक्ष और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expansion) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा सूत्रों की मानें तो बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly elections) में पार्टी को मिली शानदार सफलता के बाद अब केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम का एलान कर सकता है। बिहार में भाजपा के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने के बाद, अब उत्तर प्रदेश में भी बड़े संगठनात्मक बदलावों का दौर शुरू होगा। भाजपा आलाकमान दिसंबर तक प्रदेश को नया अध्यक्ष दे सकता है और इसके साथ ही योगी 2.0 मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार भी किया जाएगा।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को पिछले लगभग 11 महीने से नए प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार है। यह नियुक्ति कभी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में उपचुनाव, तो कभी हालिया बिहार चुनाव के चलते अटकी हुई थी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार चुनाव के नतीजों के बाद ही उत्तर प्रदेश में बदलाव करने का फैसला टाल रखा था। अब आलाकमान बिना किसी ज्यादा देरी के दिसंबर तक सरकार और संगठन में जरूरी बदलाव कर देगा।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जिन नामों पर मंथन चल रहा है उनमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, धर्मपाल सिंह, का नाम तेजी से चल रहा है। 

ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी इस कतार में शामिल हैं। हालांकि चुनावों को देखते हुए संगठन की तरफ़ से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) पर दाव लगाने की संभावना ज़्यादा है। इस लिहाजा से स्वतंत्रदेव सिंह या केशव मौर्य के नाम पर पार्टी दाव लगा सकती है। बिहार में संपन्न हुए चुनाव में भाजपा आलाकमान ने केशव प्रसाद मौर्य को पहले सह प्रभारी नियुक्त किया फिर केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया। भाजपा के इस कदम की वजह से उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा है कि श्री मौर्य को प्रदेश में बड़ी ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, प्रदेश अध्यक्ष के अलावा उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की भी अटकलें तेज से लगाई जा रही हैं। सूत्रों की माने तो पहले संगठन नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करना चाहता है जिसके लिए संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा।

भाजपा सूत्रों की मानें तो अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव और उसके बाद 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार होना है। अभी उत्तर प्रदेश में नियम के अनुसार छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व अगड़ा, पिछड़ा और दलित समीकरण बैठाने की तैयारी में जुटा है।
पूर्व पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के कारण कैबिनेट मंत्री के पद रिक्त हैं। वर्तमान में, मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

 इसका मतलब है कि मंत्रिमंडल के लिए छह पद खाली हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाना तय है। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, " भाजपा को बिहार चुनाव में जो बड़ी जीत मिली है उसका असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। जिस तरह से केशव प्रसाद मौर्य को आलाकमान की तरफ़ से तरजीह दी जा रही है उससे लगता है कि वह इस दौड़ में वो बाक़ी प्रतिद्वंदियों से आगे हैं। सवर्ण सीएम होने के बाद पार्टी ओबीसी चेहरे पर ही दाव लगाएगी। जहाँ तक ब्रजेश पाठक की दावेदारी का सवाल है तो उनके नाम पर काफ़ी संशय है।"

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